
डोंगरगढ़ ।जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ने के कारण जहां आम लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, वहीं छोटे-छोटे बच्चे अब भी आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचने को मजबूर हैं। ऐसे में उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है। अभिभावकों ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है और प्रशासन से त्वरित निर्णय लेने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, जिले में स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है, जिससे स्कूली बच्चों को गर्मी से राहत मिल रही है। लेकिन इसके विपरीत आंगनबाड़ी केंद्रों में अभी भी नियमित रूप से बच्चों की उपस्थिति जारी है। तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच छोटे बच्चों का घर से निकलकर केंद्र तक पहुंचना न केवल मुश्किल है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
अभिभावकों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले अधिकांश बच्चे 3 से 6 वर्ष की आयु के होते हैं, जिनकी सहनशक्ति कम होती है। इतनी तेज गर्मी में उनका बाहर निकलना उन्हें बीमार बना सकता है। कई बच्चों को सिरदर्द, उल्टी, चक्कर और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद केंद्रों का संचालन जारी रहना चिंताजनक है। गैर सरकारी संस्था छत्तीसगढ़ सेवा कल्याण परिषद की अध्यक्ष संगीता जैन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिस प्रकार स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है, उसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में भी तत्काल अवकाश लागू किया जाए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए। यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो बच्चों की स्थिति और बिगड़ सकती है।
वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार केंद्रों का संचालन कर रही हैं, लेकिन अत्यधिक गर्मी में बच्चों की उपस्थिति कम हो रही है और उन्हें संभालना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई बार बच्चों को असहज महसूस होता है, जिससे कार्यकर्ताओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भीषण गर्मी के दौरान छोटे बच्चों को बाहर निकलने से बचाना चाहिए और उन्हें पर्याप्त पानी, हल्का भोजन एवं ठंडी जगह में रखने की आवश्यकता होती है। इस मौसम में लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
ऐसे में आवश्यकता है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय करे। आंगनबाड़ी केंद्रों में भी ग्रीष्मकालीन अवकाश लागू कर बच्चों को राहत दी जाए, ताकि वे इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रह सकें। फिलहाल, अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।





