पंडरिया ।कबीरधाम जिले के ब्लॉक मुख्यालय पंडरिया में आवारा मवेशियों की समस्या अब आम नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता की पहचान बन चुकी है। हजारों गौसेवकों, गौसेवा संस्थानों, पुलिस प्रशासन और नगर पालिका परिषद पंडरिया की मौजूदगी के बावजूद खेतों में घूमते मवेशी किसानों की फसलें चौपट कर रहे हैं।
किसानों के लिए फसल सिर्फ उपज नहीं, बल्कि जीवन का आधार, रोज़गार का साधन और परिवार के भविष्य की गारंटी होती है। लेकिन इस सच्चाई से दूर बैठे राजनीतिक प्रतिनिधि और शासकीय अमला किसानों की पीड़ा को समझने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
खास बात यह है कि आवारा पशुओं की रोकथाम को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा पुलिस व नगरीय प्रशासन को कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी न्यायालय की अवमानना की ओर इशारा करती है। आरोप है कि धर्म और राजस्व के नाम पर दिखावटी व्यवस्थाओं की आड़ में जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं।
अब सवाल सीधे और तीखे हैं—क्या ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद पंडरिया प्रशासन इस समस्या पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा?
क्या जिला और राज्य सरकारें अब भी केवल भाषणों और कागजी बैठकों तक सीमित रहेंगी? या फिर किसान यह मान ले कि तथाकथित किसान हितैषी सरकार वास्तव में किसानों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है?
किसानों की चेतावनी स्पष्ट है—यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।






