कवर्धा/बोड़ला। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उप संभाग बोड़ला के अंतर्गत ग्राम पंचायत शीतलपानी में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि केंद्र के निर्माण में शासन द्वारा प्रतिबंधित लाल ईंट, लोकल रेत एवं निर्धारित निर्माण मानकों के विपरीत सामग्री का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है, जबकि यह कार्य न्यायालय के आदेशों और शासकीय नियमों का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है।
सूचना पटल से पारदर्शिता गायब सबसे अहम और चौंकाने वाला पहलू यह है कि निर्माण स्थल पर लगाए जाने वाले अनिवार्य सूचना पटल पर आवश्यक जानकारियां या तो अंकित नहीं हैं या फिर पूरी तरह अनुपस्थित बताई जा रही हैं। नियमानुसार सूचना पटल पर कार्य की स्वीकृत लागत, कार्य आदेश क्रमांक, निर्माण एजेंसी का नाम, प्रारंभ व पूर्णता की तिथि, तकनीकी स्वीकृति, प्राक्कलन राशि, जिम्मेदार अभियंता व तकनीकी सहायक का विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना चाहिए। लेकिन स्थल निरीक्षण में यह पारदर्शिता गायब नजर आ रही है, जिससे निर्माण कार्य की वैधता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रतिबंधित सामग्री के उपयोग के आरोप सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के पर्यावरण संरक्षण नियमों एवं निर्माण कार्यों से जुड़े दिशा-निर्देशों के तहत अवैध खनन से प्राप्त रेत और प्रतिबंधित लाल ईंटों के उपयोग पर स्पष्ट रोक है। इसके बावजूद ग्राम शीतलपानी में बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र में इन सामग्रियों का उपयोग किया जाना न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि इससे भवन की गुणवत्ता और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
कोर्ट आदेश की अवहेलना का आरोप निर्माण सामग्री के उपयोग को लेकर न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें पर्यावरण अनुकूल एवं स्वीकृत सामग्री के प्रयोग का आदेश है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी एवं विभागीय अमले द्वारा इन आदेशों की अनदेखी की जा रही है। यह स्थिति न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के अंतर्गत गंभीर अपराध की श्रेणी में






