
धमतरी राजस्व मामलों में तारीख पर तारीख: नए अधिकारी से उम्मीद, लेकिन चुनौतियां बरकरार
चुनेश साहू । धमतरी
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की तहसील और राजस्व न्यायालयों में सामान्य प्रकरणों की सुनवाई लंबे समय से ‘तारीख पर तारीख’ के चक्र में फंसी रही है। गरीब पक्षकारों, आवेदकों और अनावेदकों को बार-बार अदालत के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक यात्रा, समय और आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है। कई मामलों में महीनों या वर्षों तक फैसला लंबित रहता है, जिससे आम जनता में न्याय व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ती जा रही है।
दिसंबर 2025 में धमतरी जिला में अधिकारियों के कार्यभार में बदलाव किए गए, जिसमें कुछ डिप्टी कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। नए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति से जनता में नई उम्मीद जगी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब प्रकरणों में लेटलतीफी कम होगी और न्यायिक प्रक्रिया पटरी पर दौड़ेगी। यदि नए अधिकारी सक्रियता दिखाएं तो पुराने ढर्रे से छुटकारा मिल सकता है और मामलों का तेजी से निपटारा संभव है।
धमतरी जिला प्रशासन इन दिनों नवाचारों के लिए भी चर्चा में है। जिले को उभरते स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासनिक कार्यों, राजनीतिक-सामाजिक जिम्मेदारियों और विभिन्न नवाचारी योजनाओं का क्रियान्वयन केंद्र धमतरी जिला रहा है जिसके कारण भी पीठासीन अधिकारी कार्यों में होने के कारण प्रकरणों में लंबित है,जो जिले की प्रगति का भी संकेत है।
हालांकि, नकारात्मक पक्ष यह है कि इन व्यस्तताओं को बहाना बनाकर राजस्व मामलों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यदि न्यायालय के काम को आड़ बनाकर आम जनता की समस्याओं का निराकरण टाला जाता रहा तो कोई बड़ा बदलाव असंभव है। पक्षकारों पर पड़ने वाला अतिरिक्त व्यय बोझ और न्याय में देरी से गरीबों का विश्वास डगमगा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक व्यस्तता के बावजूद प्राथमिकता तय कर न्यायिक प्रक्रिया को सुचारू बनाना जरूरी है, वरना पुरानी शिकायतें जारी रहेंगी। कुल मिलाकर, नए अधिकारी से सकारात्मक बदलाव की उम्मीद तो है, लेकिन यह देखना बाकी है कि व्यावहारिक चुनौतियों के बीच कितना सुधार होता है। जनता की निगाहें अब नए पीठासीन अधिकारी के नए कदमों पर टिकी हैं कि क्या अधिकारी इनके पदचिन्हों पर चलेंगे या बदलाव होगा ।





