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सक्ती जिले में हाथियों का आतंक, 18–20 जंगली हाथियों का झुंड पहुंचा आबादी की ओर

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ग्रामीणों में दहशत, खेतों में खड़ी फसलें रौंदकर लौटाया महीनों की मेहनत

सक्ती।

कोरबा जिले के घने जंगलों से भटककर आए लगभग 18 से 20 जंगली हाथियों के विशाल झुंड ने सक्ती जिले की सीमा में कोहराम मचा दिया है। ऋषभतीर्थ–सलिहाभाठा क्षेत्र में अचानक इन हाथियों की मौजूदगी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सुबह से ही ग्रामीणों ने हाथियों को पहाड़ी इलाकों में मंडराते देखा, लेकिन अंधेरा होते ही यह विशाल झुंड गांवों की ओर बढ़ गया, जिससे स्थिति और भयावह हो उठी।

रातभर हाथियों की आवाजाही ने स्थानीय लोगों को दहशत में रखा। कई ग्रामीण घरों से बाहर निकले बिना रातभर जागते रहे। इस दौरान हाथियों ने किसानों की धान की खड़ी फसलें रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया। कुछ ही घंटों में महीनों की मेहनत चौपट हो जाने से किसान मायूस और आक्रोशित हैं।

वन विभाग हाई अलर्ट पर, टीमों की लगातार निगरानी

हाथियों की मूवमेंट अनिश्चित बनी हुई है। कभी पहाड़ी की ओर, तो कभी गांव की दिशा में झुंड बढ़ जा रहा है, जिससे खतरे की स्थिति बनी हुई है। मामला गंभीर देखते हुए वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी किया है। विभाग की कई टीमें गांव–गांव पहुंचकर:

लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रही हैं रात में खेतों और सुनसान रास्तों से दूर रहने की सलाह दे रही हैं हाथियों की संभावित दिशा का आकलन कर निगरानी कर रही हैं वन अधिकारियों ने बताया कि झुंड लगातार स्थान बदल रहा है, इसलिए ग्रामीणों को अत्यधिक सतर्क रहना आवश्यक है।

ग्रामीणों में भय का माहौल, रात में हाथियों की गर्जना से दहशत

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो दिनों से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रात के समय हाथियों का शोर, पेड़ तोड़ने और खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने की आवाजें सुनाई देती हैं, जिससे बच्चे और महिलाएं भी डरे हुए हैं। कई लोगों ने अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है।

किसानों की पीड़ा: “फसलें खत्म, अब मुआवजा ही सहारा”

हाथियों द्वारा धान की खड़ी फसलें रौंदे जाने के बाद किसानों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी सीजन की मेहनत कुछ ही घंटों में नष्ट हो गई है

“रात भर हाथियों की आवाज आती रही। हम डर के मारे घर से बाहर भी नहीं निकल पाए। हमारी फसलें पूरी तरह बरबाद हो गईं। सरकार जल्दी से जल्दी नुकसान का आकलन करे।”

“पहली बार हमने इतना बड़ा झुंड गांव के अंदर आते देखा। बच्चे, महिलाएं सभी दहशत में हैं। वन विभाग की टीम तो आ रही है, लेकिन हाथी कभी भी दिशा बदल देते हैं। हमें अपनी सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।”

स्थिति गंभीर, अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण

वन विभाग का कहना है कि झुंड की दिशा और मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाथियों के गांव की ओर रुख बदलने की संभावना बनी हुई है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे कोई भी अनावश्यक जोखिम न लें और हाथियों से दूरी बनाए रखें।

सक्ती में हाथियों के इस आतंक ने एक बार फिर मानव–वन्यजीव संघर्ष की समस्या को उजागर किया है। अब देखने वाली बात यह है कि वन विभाग की कार्यवाही और प्रशासन की सतर्कता से आने वाले दिनों में स्थिति कैसे नियंत्रण में आती है।

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