
जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के राष्ट्रीय कांक्लेव में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के चार प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री सर जॉयल उरांव, दुर्गा दास उइके तथा सचिव विभू नायर भी उपस्थित रहे।
अभियान का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करना है, जिसमें विकेंद्रीकृत आदिवासी नेतृत्व को मजबूत करना, ग्राम कार्य योजनाओं का निर्माण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी प्रमुख है। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में जनजातीय समुदायों की संस्कृति संरक्षण और ‘आदि संस्कृति’ डिजिटल प्लेटफॉर्म के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आदि सेवा केंद्रों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अभियान ग्रामीण विकास की नई दिशा बनेगा।

धमतरी से जिला मास्टर ट्रेनर देवेंद्र कुमार वासनिक, ब्लॉक मास्टर ट्रेनर उपेंद्र वर्मा, ग्राम पंचायत गंगरेल के सचिव डोमेंद्र सिन्हा तथा कसावाही ग्राम पंचायत के सरपंच सोमन राम मंडावी ने सत्रों में भाग लिया। उन्होंने ग्राम स्तर पर विलेज एक्शन प्लान (वीएपी) और विजन 2030 पर चर्चा में योगदान दिया। वासनिक ने बताया कि अभियान से धमतरी के आदिवासी गांवों में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।
कांक्लेव में 20 राज्यों के अधिकारियों ने मॉडल प्रस्तुत किए, जिसमें आदि सेवा दिवस और विशेष ग्राम सभाओं पर फोकस रहा। छत्तीसगढ़ में अभियान 17 सितंबर से चल रहा है, जो जनजातीय परिवारों को आवास, स्वास्थ्य व शिक्षा से जोड़ रहा है। यह आयोजन आदिवासी सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।





