



छग/ धमतरी
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला की सबसे पुरानी और बहुप्रतीक्षित मांग कोलियरी ख़रेंगा दोनर मार्ग है जिसे पूर्व सीएम भूपेश बघले ने इसे स्वीकृति प्रदान की थी। करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाली इस सड़क का भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में कलेक्ट्रेट परिसर में विधिवत भूमि पूजन किया गया।
जिसके बाद लोक निर्माण विभाग के माध्यम इस सड़क का निर्माण कार्य जारी है। सड़क के 32 गांव के ग्रामीणों के द्वारा लगातार वर्षों से दोनों ही सरकारों से मांग की जा रही थी जिसका नतीजन निर्माण कार्य जारी है…
लेकिन क्षेत्र वासियों के संघर्ष के विपरित अफ़सर सड़क निर्माण में भारी अनियमितता बरतने का कार्य कर रहे हैं जहां स्टीमेट मुताबिक मुरूम बिछाने का है लेकिन जिम्मेदार अफसर कमीशन खोरी के चक्कर में मिट्टी को भी मुरूम बता दे रहें हैं ।
वहीं बीती शाम को हुए झमाझम बेमौसम बरसात ने पीडब्ल्यूडी विभाग के तमाम दावे और सड़क पर बिछाए गए मिट्टी नामक अप्रूव्ड मटेरियल की पोल खोल कर रख दी है आलम यह है कि इस एक बारिश के चलते बनाए गए छोटे पुल के किनारे अगल बगल में डाले गए मिट्टी के कारण लोगों का चलना दूभर हो गया है वहीं पार करने बनाए गए अस्थाई बायपास से लोगों को पुनः आवाजाही करनी पड़ी..
वहीं इस पुलिया में मिट्टी डालने के चलते कई लोग जख्मी और मोटर सायकल वाहन गिरते नजर आए रात के अंधेरे में पुलिया पर सेंट्रल लैब द्वारा स्वीकृत अप्रूव्ड मटेरियल के कारण लोग जख्मी होते नज़र आए।
धमतरी विधायक ओंकार साहू ने कहा है कि कोलियरी ख़रेंगा दोनर मार्ग बहुप्रतीक्षित मांग का नतीजा है जिसमें कांग्रेसियों के संघर्ष के फलस्वरूप पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सुदृढ़ीकरण, मजबूतीकरण चौड़ीकरण के लिए स्वीकृति और भूमिपूजन किया गया था।
लेकिन शासन बदलते ही भ्रष्टाचार का खेल शुरू हो चुका है, जिनमें अमानक मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, इस पर ग्रामीण और जनप्रतिनिधि द्वारा विरोध करने पर भी पप्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है ।
वहीं ठेकेदार द्वारा कमीशन लेकर पेटी ठेकेदार को काम दे दिया गया जिससे इसकी गुणवत्ता का आंकलन किया जा सकता है ,
इस सड़क को लेकर pwd मंत्री को संज्ञान में भी लाया गया है, साथ ही ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों द्वारा जल्द ही ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी विभाग प्रशासन के खिलाफ एक उग्र आंदोलन चक्का जाम और प्रदर्शन करने की तैयारी की बात कही है।
वहीं सड़क पर मिट्टी डाले जाने के संबंध में पीडब्ल्यूडी विभाग के एसडीओ सह सब इंजीनियर मनीष साहू का कहना है कि वह अप्रूव्ड ( जांच एजेंसी/विभाग द्वारा स्वीकृत सामग्री ) बताया है। इसकी जांच सेंट्रल लैब रायपुर से टेस्ट कराया गया है।
अब खेत या निर्माणाधीन सड़क के किनारों से ही मिट्टी को लाकर डाल दिया जाना और अधिकारियों की कमीशन खोरी के चलते अप्रूव्ड मटेरियल बताया जाना… कहीं न कहीं अधिकारियों की सांठगांठ का आदेश है।
मामले में पीडब्ल्यूडी कार्यपालन अभियंता ने कहा है कि मुरूम कमी के चलते यह पीली मिट्टी डाला गया है जो टेस्टेड है, वहीं पुलिया पर मिट्टी को आवाजाही के लिए व्यवस्था बताया है साथ ही ठेकेदार को मिट्टी हटाने की बात कही है।
बहरहाल देखना होगा अब इस मामले में पीडब्ल्यूडी विभाग मंत्री साथ ही जिला कलेक्टर क्या संज्ञान लेते हैं।