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टूटती मनोबल ग्रामीण भारत की, सड़को के मोहताज है पौनी के विद्यार्थी, किसान, आम जन

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@ ✍️✍️✍️अजय जांगड़े
कबीरधाम: जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पौनी की सड़को का हाल बेहाल है जो 20 वर्षो से अधिक हो चुके हैं जो बरसात आते ही दलदल नुमा हो जाते हैं जिससे जन जीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो जाता है। ग्राम पंचायत पौनी में सड़को को लेकर उदासीनता बनी हुई है। जिसका विरोध दलदल नुमा सड़क का विडियो, फोटो शोशल मीडिया के माध्यम से भेज विरोध जता रहे हैं।
जिसे जानने के लिए हिन्द मीडिया न्यूज (वैब न्यूज) के द्वारा ग्राम पहुंच ग्रामीण जनों से चर्चा कर पूरी बात जानने की कोशिश की गई। वहा पर मौजूद लोगों ने बताया कि पौनी से पेंड्री खुर्द गांव को जोड़ने वाली सड़क है जो पिछले बीस वर्षों से अपनी अच्छे दिनों के इंतजार में जनप्रतिनिधि गणों के भरोसे है ,जो आज पर्यन्त तक सड़क निर्माण नही हुई है।विधानसभा, लोकसभा के जन प्रतिनिधि सहित सरपंचों के द्वारा भी नजरंदाज कर दिया जाता है की आज यह स्थिति निर्मित है ।
ग्राम वासियों को सड़क मुहैया ना कर पाना शासन व प्रशासन की लाचारी को भी समझ की नजर आ रही हैं जिसके चलते यहां की सड़के उपेक्षित हैं।
ग्रामीण जनों ने यह भी बताया कि अनेकों बार मौखिक व लिखित रूप से इस तरह की बदहाल सड़कों की नवीन निर्माण की मांगो को लेकर जिला प्रशासन व जन प्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है पर दुर्भाग्य आज भी पौनी ग्राम पंचायत से पेंड्री खुर्द की ओर जाने वाली सड़क बद से बदतर हाल में ही है।
छात्र, छात्राओं को भी इस बारिश की समय में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है चाहे विद्यालय जाने के लिए हो या विद्यालय से वापस लौटते समय ही क्यों न हो गांव की यह छोटी सकरा रास्ता जिसमे अगर एक कृषि कार्य में लगे ट्रैक्टर भी आ जाए तो छात्र छात्राओं को किनारा हो पाना संभव नहीं हो पाता जिसके कारण कभी कभी कीचड़ में जा गिरते हैं और पूरी पुस्तकें, कापियां नीचे कीचड़ से लथ पथ हो जाया करती है। गिरने का सिलसिला यहां तक नही इस दलदल नुमा सड़क पर सायकल भी चला पाना संभव नहीं होता है वहीं मोटर साइकिल चालकों को भी अनेकों बार गिरना पड़ जाता है जो अनचाही घटना होती जिससे शरीरीक रूप से ही नही आर्थिक रूप से भी हानि पहुंचाती है।
आकस्मिक बीमार पड़ जाने पर भी तत्कालीन प्राथमिक उपचार करा पाना संभव नहीं हो पा रहा जिससे अनेकों तरह की समस्या पैदा हो रही कभी किसी किसी जान भी चली जायेगी ऐसा हालात पैदा हो जाता है। अक्सर बरसात के दिनों में सड़क की दुर्दशा होने की वजह से यह कठिनाई सामने आती हैं।
मुख्य कारण है कि इसमें मरम्मत जैसी कोई कार्य नहीं हुआ है अगर हुआ भी तो मिट्टी नुमा दिखावे की कार्य हुआ है जो राजस्व कमाने वाले अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि गणों की जेब में चली गई यह सड़क वर्षो से अपने निर्माण को लेकर उपेक्षित है जिसे प्रशानिक स्तर से न सही शासन स्तर कार्य निर्माण कार्य कराने की इल्तिज़ा पर है।
यह सड़क एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ने वाली सड़क है आज विकास की डगर पर भारत देश और छत्तीसगढ़ राज्य है तो वह सिर्फ ग्रामीण भारत के ही बलबूते पर है इस किसान समृद्ध राज्य की सड़के अपने होनहार कृषक, मजदूर, विद्यार्थियों, और छोटे छोटे कस्बों में रहने वाले आम जनताओं को सड़कों जैसे मूलभूत सुविधाओं के लिए उपेक्षित होना पड़ रहा है जो वास्तविक में राज्य की नीति और जनप्रतिनिधि सहित प्रशासन की ओर मुंह ताकते ग्रामीण जन प्रश्न चिन्ह लेकर अपेक्षित है की उनके सपनों के भारत में आखिर क्यों? ऐसा हो रहा है उनके ही हक अधिकार की सुविधाएं विहीन क्यों होती चली जा रही है। जो अखंड भारत का मात्र जाना जाया जाने वाले ग्रामीण क्षेत्रों की चीखे पुकार पुकार कर कह रही है आखिर कब होगा मेरा डगर की विकास।

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