
: अजय जांगड़े
कवर्धा, नगर के डालडापारा में पानी की किल्लत थमने का नाम ही नहीं ले रहा है इतर उतर पानी की तलाश में एक घरों से दूसरे के घरों में पानी मांगने जाना पड़ रहा है जो कवर्धा के रहवासियों के लिए किसी दुर्भाग्य से कम नहीं है।
पानी की किल्लत कोई नई समस्या नहीं है ये पिछले समय से बनी हुई है पर सरकार की ओर से किसी भी तरह की इस जीवन और मृत्यु से जुड़ी हुई समस्या का समाधान कर सकना संभव नहीं नजर आ रहा है।
बड़े बड़े वायदे करने वाली सरकार की सत्तासीन होने के बावजूद भी पानी और स्वच्छता की बदहाली में सुधार आने का नाम ही नहीं ले पा रहा है जहां जनता नगरपालिका परिषद कवर्धा की व्यवस्था पर उंगली उठा रहे हैं वहीं सूबे के सरकार व स्थानीय प्रतिनिधियों को भी कोसने का काम करने लगे हैं। जो अपने मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति के लिए एक अच्छा राजनैतिक पार्टी व सरकार स्थापित कर खुशी के स्थान पर पछतावा होना स्वीकार कर रहे हैं।
कवर्धा ,जिले के हृदय स्थान ही है जहां जिला अधिकारी से लेकर चौकीदार तक के पद में पदाभिहित होने वाले कार्यालय व संस्थान है पर आम जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है तो ग्रामीण क्षेत्रों का क्या स्थिति होगा ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने सरकार के अधीन रहने वाले जल आपूर्ति करने वाले नगर पालिका परिषद कवर्धा से उम्मीद करता है कि वह इस तरह की समस्या से डालडापारा के रहवासियों को निजात दिलाए और हमर कवर्धा खुशहाल कवर्धा कहे जाने वाला वाक्या को विकास की डगर पर रख सके।





