
गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों (अजीत सिंह, उम्र 17वर्ष,जुझार सिंह, उम्र 15 वर्ष, जोरावर सिंह उम्र 9 वर्ष और फतेह सिंह उम्र 7 वर्ष) ने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी; दो बड़े साहिबजादे चमकौर के युद्ध में शहीद हुए, जबकि छोटे साहिबजादों को नवाब वज़ीर खान ने जिंदा दीवार में चुनवा दिया, क्योंकि उन्होंने इस्लाम कबूल करने से इनकार कर दिया था, और उनकी इस वीरता के सम्मान में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है।
चार साहिबजादों की शहादत की कहानी:
पृष्ठभूमि: मुगलों के खिलाफ धर्मयुद्ध के दौरान, गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार दिसंबर 1705 में कुर्बान हो गया।
बड़े साहिबजादे (अजीत सिंह और जुझार सिंह): चमकौर के युद्ध में मुगल सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
छोटे साहिबजादे (जोरावर सिंह और फतेह सिंह): इन्हें माता गुजरी जी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। नवाब वज़ीर खान ने उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
शहादत: 26 दिसंबर, 1705 को, सरहिंद के नवाब वज़ीर खान के आदेश पर, उन्हें ज़िंदा दीवार में चुनवा दिया गया। इस घटना के बाद, माता गुजरी जी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
स्थान: जिस जगह यह बलिदान हुआ, वह अब गुरुद्वारा फ़तेहगढ़ साहिब के नाम से जाना जाता है।
महत्व और ‘वीर बाल दिवस’:
यह बलिदान धर्म, मानवता और मातृभूमि की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस का प्रतीक है।
रिपोर्टर – गगनदीप सिन्हा
हिरदे सिन्हा
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