
क्या नियम-कानून सिर्फ आम जनता के लिए, विभागीय मेहरबानी से बचते ठेकेदार?

कटघोरा-:वन मंडल कटघोरा के अंतर्गत वन परिक्षेत्र जटगा के सुतर्रा सर्किल, प्लॉट क्रमांक P-308 में भारी मात्रा में पाइप पिछले कई महीनो से खुलेआम जंगल मे रखें हुए है, जहाँ बड़ी मात्रा मे सागौन प्लांटेंशन शासन के द्वारा कराया गया है लेकिन पाइप के वजह से बेस कीमती सागौन, साल के छोटे बड़े पौधे नुकसान हो रही हैं जिससे शासन को राजस्व का हानि हो रही है,।जानकारी के अनुसार यह पाइप किसी सरकारी योजना से जुड़े बताए जा रहे हैं, लेकिन सवाल बड़ा है कि क्या बिना अनुमति वन भूमि का उपयोग करना सीधा-सीधा कानून का उल्लंघन नहीं है? जो विभाग की आँखों तक यह नहीं दिखाई दे रहा है….!

कानून तो साफ है, लेकिन विभाग खामोश!
भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि पर किसी भी सामग्री या उपकरण रखने से पहले स्पष्ट अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति यह कार्य ‘अवैध अतिक्रमण’ की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
ग्रामीणों की नाराज़गी — “क्या विभाग आँखें मूँद कर बैठा है?”
ग्रामीणों ने कड़ी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि “पाइप कई दिनों से रखे हैं, लेकिन न अनुमति का बोर्ड दिखा, न ही विभाग की कोई कार्रवाई। अगर आम आदमी लकड़ी का एक गट्ठा भी जंगल से ले जाए तो तुरंत अपराध बना दिया जाता है, फिर यहाँ विभाग चुप क्यों है?”
अधिकारियों को सूचना दी गई, फिर भी चुप्पी!
मामले की जानकारी वनपाल मोहन सिंह ठाकुर एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी दोहरे को दी गई, लेकिन विभागीय अमला आज तक मौन है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग ठेकेदार या परियोजना संचालक के सामने नतमस्तक है, या फिर मिलीभगत से आँखें मूँद ली गई हैं?
अब देखने वाली बात यह होगी कि खबर प्रकाशन के बाद विभाग हरकत में आता है या नहीं। अगर अब भी चुप्पी बनी रहती है तो यह विभाग की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े करेगा और आमजन में यह संदेश जाएगा कि वन भूमि पर नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।





