hindmedianews
Breaking News
क्राइमछत्तीसगढ़ब्रेकिंग न्यूज़

एक पेड़ माँ के नाम, पूरा जंगल माफिया के नाम!” — कटघोरा वनमंडल में वन भूमि पर माफिया का कब्जा, विभाग बना मूकदर्शक…!

IMG-20250714-WA0596
previous arrow
next arrow

कटघोरा वन मण्डल मे जंगल का सौदा, OA-599 मे भू माफियों का हौसला हुए बुलंद..!

कोरबा/पाली(कटघोरा):- छत्तीसगढ़ सरकार जहाँ एक ओर “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी पर्यावरणीय योजनाओं को साकार करने का सपना देख रही है, वहीं कटघोरा वनमंडल के पाली रेंज अंतर्गत मुरली सर्किल के नोनबीर्रा गांव में सरकार की योजनाओं को ठेंगा दिखाते हुए माफिया वन भूमि पर धड़ल्ले से कब्जा कर रहे हैं।

कम्पार्टमेंट नंबर OA-599 के जंगल में इन दिनों पेड़ नहीं, बल्कि अवैध कब्जे उगते नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि वह क्षेत्र वन भूमि है, लेकिन वन विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी। न कोई नोटिस, न कोई चेतावनी, और न ही किसी तरह की कार्रवाई — आखिर क्यों?

वन विभाग की चुप्पी: संयोग या साजिश?

यह चुप्पी खुद बयां कर रही है कि या तो वन विभाग मूकदर्शक बन बैठा है, या फिर मामले में मिलीभगत की बू आ रही है।
“जहाँ रखवाले ही लुटेरे बन जाएँ, वहाँ जंगलों की किस्मत में सिर्फ उजाड़ ही लिखा है।”

सरकार क्या अपने अफसरों को एसी दफ्तरों में आराम फरमाने के लिए तनख्वाह देती है या फिर जंगलों की रक्षा के लिए? यह सवाल अब आमजन से उठकर सरकार के दरवाजे तक पहुँच चुका है।

 

सूत्रों का दावा: चल रही है अवैध खरीद-बिक्री!

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस वन भूमि पर माफियाओं द्वारा खरीद-फरोख्त की जा रही है — जी हाँ, वही भूमि जो वन अधिनियम के तहत संरक्षित है। यह पूरी प्रक्रिया न सिर्फ कानून का मजाक उड़ाती है बल्कि सरकार की नीयत और नीतियों पर भी सवाल खड़े करती है।

अवैध कब्जा: रसूखदारों का संरक्षण या विभाग की बेबसी?

क्या अतिक्रमणधारी कोई रसूखदार हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई करना विभाग को “करेला ऊपर से नीम चढ़ा” लग रहा है?
क्या यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे का है या वन अधिकारियों की जेब गर्म कर दी गई है? जब सरकार “हरियाली बचाओ” के नारे देती है, तब यह दृश्य किसी विकास विरोधी मजाक से कम नहीं।

वन विभाग की नाकामयाबी पर सवालों की बौछार…

आखिर क्यों अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई?

क्या विभाग किसी “ऊपर से दबाव” में काम कर रहा है?

अगर यह वन भूमि है, तो कब्जाधारियों के खिलाफ FIR क्यों नहीं दर्ज की गई?

विभाग क्या अपनी भूमिका भूल चुका है?

सरकारी योजनाएँ सिर्फ कागज़ों में?

“एक पेड़ माँ के नाम, पूरा जंगल माफिया के नाम” — यह जुमला अब क्षेत्र के लोगों के मुँह से सुनाई देने लगा है।
सरकार जहाँ एक ओर पर्यावरण को लेकर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर हालात ‘ढाक के तीन पात’ वाले हैं।

जनता की आवाज़: जंगल बचेगा तो साँस बचेगी..

वन विभाग की निष्क्रियता से लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल हमारा जीवन है, और जब वही उजड़ रहा है तो सरकार की नीतियाँ सिर्फ दिखावा बनकर रह गई हैं।

अब सवाल सरकार से है – क्या वह अपनी योजनाओं को “धरातल” पर उतारना चाहती है या सिर्फ “कागज़ों” में हरियाली दिखा कर पीठ थपथपाना चाहती है?
क्या जंगल माफियाओं के नाम होगा या आने वाली पीढ़ियों के लिए बचेगा?

प्रशासनिक चुप्पी:-इस संबंध में जब वनरक्षक से संपर्क करने उनके मोबाइल नंबर 083195 59688 पर कॉल मिलाया गया, तो घंटी तो गई, लेकिन वनरक्षक साहब ने कॉल उठाना मुनासिब नहीं समझा।

जंगल उजड़ रहा है, माफिया कब्जा कर रहे हैं, और जिम्मेदार अधिकारी की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या यह लापरवाही है या जानबूझकर नजरअंदाजी?

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस खबर के बाद क्या प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर जंगलों की यह दुर्दशा यूं ही मूकदर्शकों के सामने होती रहेगी?

संबंधित पोस्ट

इंग्लैंड में पाकिस्तानी टीम से जुड़ेंगे मोहम्मद आमिर, दोनों कोरोना टेस्ट आया नेगेटिव

Admin

*शहीद जवान का पार्थिव शरीर पहुंचा दिल्ली…* *दिल्ली में दी जाएगी सलामी…. देर शाम तक पहुंचेगी रायपुर….*

Chunesh Sahu

जिस हाथी ने धमतरी में मचाया था खूब उत्पात और 5 लोगो को रौंदकर उतार दिया था मौत के घाट….हाथी की हुई दर्दनाक मौत….पढ़िए पूरी खबर…

Chunesh Sahu

गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने में सरकार प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही : तारणी चंद्राकर*

Chunesh Sahu

Chunesh Sahu

प्राथमिक शाला केशलीगोड़ान में शिक्षकों ने दीपावली पर्व के अवसर पर स्कूली बच्चों एवं कर्मचारियों किए उपहार भेंट

hindmedianews