
कवर्धा,दिल्ली पब्लिक स्कूल, महाराजपुर, कवर्धा में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, भुवनेश्वर के तत्वावधान में “कला एकीकरण पर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम” (Capacity Building Program on Art Integration) का सफल आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण सत्र सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चला, जिसमें विद्यालय के शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को यह समझाना था कि कैसे कला को शैक्षणिक विषयों में एकीकृत कर पढ़ाई को अधिक प्रभावशाली, रोचक और छात्र-केंद्रित बनाया जा सकता है। जब शिक्षा को वास्तविक जीवन, रचनात्मक अभिव्यक्ति और कला के माध्यम से जोड़ा जाता है, तो विद्यार्थियों की सहभागिता एवं सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है।
इस अवसर पर CBSE द्वारा नामित दो विशेषज्ञ – श्री आलोक कुमार श्रीवास्तव (प्राचार्य, अरिहंत एकेडमी, बालोद) एवं श्री शुभांक सिंह ठाकुर (अकादमिक डीन, नारायणा ई-टेक्नो स्कूल, बिलासपुर) – ने प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया। दोनों प्रशिक्षकों ने विषयवस्तु में कला के समावेश की विभिन्न तकनीकों को उदाहरणों एवं गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं जैसे विषयों में भी कला का सहज और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को नाट्य रूपांतरण, समूह कार्य, चित्र प्रस्तुति, रचनात्मक लेखन एवं वैकल्पिक मूल्यांकन जैसी नवाचारी शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया गया। सभी सत्र अत्यंत प्रेरणादायक, संवादात्मक और व्यावहारिक रहे।
समापन सत्र में विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती ग्रेशिया एन्न, फीग्रेड, ने CBSE एवं दोनों Resource Persons के प्रति आभार जताते हुए कहा, “कला शिक्षा को केवल मनोरंजक ही नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण, संवेदनशील और सृजनात्मक बनाती है। इससे छात्रों में आलोचनात्मक सोच, सामाजिक समझ और नवाचार की क्षमता विकसित होती है।”
विद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में भी ऐसे नवाचारी और शिक्षक-संवर्धन के कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई, जिससे शिक्षण गुणवत्ता और बेहतर हो सके।





