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मासूम बाल मजदूर:सरकारी कार्य में मासूमियत की बलि वन विभाग कटघरे मे

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सँवाददाता:अजय जांगड़े

कवर्धा, विधि के अनुसार भारत राजपत्र सह कानून मे बाल मजदूरी पर रोक थाम तथा मासूमों की आजादी व उनके जीवन जीने के लिए उत्तरदायी कानून लागू है।जिसके लिए बाल संरक्षण के लिए सरकारी तंत्र व भारतीय नागरिक बाध्य है।

बाल मजदूर पर रोक लगाने सरकार एक ओर विकसित भारत का सपना पूरा करने मे लगा है। पर सरकारी अमला ही इस कानून और बेरहमी से बाल्यकाल मे नन्हों की मौलिक अधिकार को तोड़ने में वन विभाग की करतूत दिखाई दे रहा है।

हरा सोना की क्रय और विक्रय के मध्य कामगार के रूप में छोटे छोटे बालक और बलिकाओ को रुपये का लालसा देकर “मई” महीने की गर्मी में उनके साथ शोशण के साथ साथ मासूम व नाबालिक भोले पन का मानसिकता का फायदा उठा विभाग राजस्व की आमदानी कर रहा है ।

बाल मजदूरी से सरकार की राजकोष मे उन्नति तो होगी लेकिन नदानों पर रहम क्यों नहीं।

यह एक गंभीर मुद्दा है जिसमें सरकारी विभाग द्वारा बाल मजदूरी का समर्थन करना देखा गया है। यह बहुत ही चिंताजनक है कि सरकारी अमला ही बाल मजदूरी कानून का उल्लंघन कर रहा है और नाबालिगों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर रहा है।

बाल मजदूरी एक गंभीर सामाजिक समस्या है जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक विकास को प्रभावित करती है। यह समस्या न केवल बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक बड़ा खतरा है।

सरकार को इस समस्या का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इसमें बाल मजदूरी कानून का पालन सुनिश्चित करना, बाल मजदूरों के पुनर्वास के लिए कार्यक्रम चलाना और बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सुविधाएं प्रदान करना शामिल है।यह एक जटिल समस्या है, लेकिन इसका समाधान संभव है। हमें इस समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग करने की आवश्यकता है।

आरोपी विभाग के खिलाफ बाल मजदूर अपराध अधिनियम के अनुरूप दंडात्मक कानूनी कार्यवाही करना आवश्यक है। यह कार्यवाही न केवल आरोपी विभाग को दंडित करने में मदद करेगी, बल्कि यह भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में भी मदद करेगी।

इसके अलावा, सरकार को बाल मजदूरी के मुद्दे पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इसमें बाल मजदूरी कानून का पालन सुनिश्चित करना, बाल मजदूरों के पुनर्वास के लिए कार्यक्रम चलाना और बच्चों के शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सुविधाएं प्रदान करना शामिल है।

यह पुरा मामला ग्राम पंचायत भोंदा का है जहाँ तेंदूपत्ता ठेकेदार और वन विभाग की तेंदुपत्ता के कर्मचारी की मिलीभगत से इस बेशर्मी कार्य को अंजाम दिया जा रहा है।

उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देगी और आवश्यक कार्यवाही करेगी।

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