
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि साय सरकार बस्तर से नक्सलवाद खत्म करने की आड़ में अब यहां की खनिज संपदा, जंगल और जमीन को बाहरी उद्योगपतियों को सौंपने की साजिश कर रही है। जोगी ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर बस्तर की आत्मा बेचने का काम कर रही है।
अमित जोगी ने बस्तर के विकास और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर एक 30 सूत्रीय मांगपत्र भी जारी किया, जिसमें बस्तर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, रोजगार, पर्यावरण और पारदर्शिता पर कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता अब ठगी नहीं जाएगी, और जनता कांग्रेस (जोगी) क्षेत्र में एक तीसरे विकल्प के रूप में उभर रही है
मुख्य मांगें :
1. नगरनार-जगदलपुर विकास प्राधिकरण का गठन कर स्थानीय स्तर पर विकास की योजना।
2. बस्तर के युवाओं को 100% रोजगार में आरक्षण, ताकि बाहर से आने वाले मजदूरों और कर्मचारियों पर निर्भरता घटे।
3. क्षेत्र की खनन परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन।
4. सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों में बढ़ते भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच।
5. हाल के बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा और पुनर्वास की त्वरित व्यवस्था।
जोगी ने कहा कि अगर सरकार ने इन मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो जनता कांग्रेस (जोगी) बस्तर की सड़कों से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी बस्तर के हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
अमित जोगी का बयान :“सरकार नक्सलवाद खत्म करने की बात कर रही है, लेकिन असल में बस्तर की लूट की तैयारी चल रही है। यहां के खनिज, जंगल और जमीन को बड़े उद्योगपतियों को सौंपने की कोशिश हो रही है। जनता कांग्रेस (जोगी) बस्तर के लोगों की आवाज बनकर इस शोषण के खिलाफ लड़ेगी।”
अमित जोगी, अध्यक्ष, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी)
राजनीतिक विश्लेषण :राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमित जोगी का यह बस्तर प्रवास पार्टी के लिए नई रणनीति का हिस्सा है। जोगी बस्तर को संगठन विस्तार का केंद्र बनाना चाहते हैं और आदिवासी व स्थानीय मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ सरकार पर लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए हैं।
हाल के वर्षों में नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थिति सुधरने के बाद खनिज आधारित उद्योगों की संभावनाएं बढ़ी हैं, जिसे लेकर राजनीतिक दलों में “विकास बनाम शोषण” की बहस तेज हो गई है।





