कवर्धा , आज 19 नवंबर, अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और समाज में उनके योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन पुरुषों की उपलब्धियों को पहचानने और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस का इतिहास
इस दिन की शुरुआत 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो में डॉ. जेरोम तीलक्सिंग ने की थी, जिन्होंने अपने पिता को प्रेरणा मानकर इस दिन को चुना था । तब से, यह दिन धीरे-धीरे पूरे विश्व में लोकप्रिय हो गया और कई देशों में मनाया जाने लगा। भारत में 2007 में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया था ।
अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस का महत्व
यह दिन पुरुषों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की बात आती है। पुरुषों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं, जैसे तनाव, अवसाद और आत्महत्या, महिलाओं की तुलना में ज्यादा होती हैं। लेकिन इसके बावजूद, पुरुषों की भावनाओं को ज्यादा मजबूत मानकर इसे सिरे से खारिज किया जाता है।
इस दिन का महत्व पुरुषों के प्रति इस सोच को बदलने की कोशिश करता है, ताकि पुरुष अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात कर सकें और अपनी मानसिक और शारीरिक परेशानियों को दुनिया के सामने आ सकें।