
छग /धमतरी
छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला नशे की जद में दिनों दिन घिरता जा रहा है जहां पर महंगे नशे को छोड़ विकल्प के रूप में सस्ते नशे के तौर पर मेडिकल स्टोर से बिना पर्चा युवाओं को नशीली दवाएं बेची जा रही हैं। जिसे दुकानदार अधिक दाम पर बिक्री कर रहे हैं।
धमतरी शहर और आसपास के ग्रामीण मेडिकल स्टोरों पर बगैर पर्चा के भी दुकानदार युवाओं को नशीली दवाएं बेच रहे हैं। अधिक दाम मिलने पर दुकानदारों को द्वारा पर्चा नहीं मांगा जा रहा। वह विभिन्न नामों वाली दवाएं जो नशा में काम आ रहीं हैं उसे बेचा जा रहा हैं। उच्च अधिकारियों का कहना है बिना पर्ची के दवाएं बेचना अपराध की श्रेणी में आता है। इन दवाओं को ज्यादा मात्रा में लेने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
आपको बताते चले कि धमतरी शहर के मुख्य चौक में स्थित एक निजी अस्पताल जहां मेडिकल सुविधा भी है, वहां पर अधिकारियों की शह और पुलिस प्रशासन के संरक्षण में नशीली दवाइयों का कारोबार फल फूल रहा है जिसकी भनक नारकोटिक्स टीम के सदस्यों को भी है बावजूद इसके ठोस कार्यवाही नहीं हो रही।
वहीं उक्त निजी अस्पताल सह मेडिकल स्टोर्स में कुछ समय पूर्व पुलिस के आला अधिकारी के निर्देशन में छापेमारी की कार्यवाही की गई थी जिसे लेनदेन कर के सेटलमेंट में निपटा दिया गया।
गुप्त सूत्रों की माने तो उक्त मेडिकल में नशीली सीरप, टेबलेट नारकोटिक्स और nrx जैसी दवाएं धड़ल्ले से चलन में है।
बदलते युग के साथ नशा करने के तरीकों में भी बदलाव आने लगा है। शराब पीकर ‘शराबी’ के तमगे से नवाजे जाने से बचने के लिए युवा वर्ग ने अब नए तरीके अख्तियार कर लिए हैं। पिछले कुछ वर्षो में नशे की दवाइयां या इंजेक्शनों को शराब के विकल्प के तौर पर अपनाने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। डॉक्टर की पर्ची के बिना ही नशे की गोलियां और इंजेक्शन आसानी से प्राप्त हो रही हैं। आपको जानकर हैरत होगी मगर यह सच है कि खांसी में प्रयोग होने वाली दवाइयों को भी नशा करने के लिए खुलेआम प्रयोग किया जा रहा है।
इस तरह से नशा कर अपनी ही दुनिया में झूमते नवयुवक वारदातों को अंजाम देने से भी नहीं चूकते, यही कारण है कि जिले में लगातार आपराधिक गतिविधियां और चाकू बटंची के कारनामे लगातार सामने आ रहे है।
इधर, दवाइयों के थोक और फुटकर विक्रेताओं को भी चंद रुपयों के लालच में इन प्रतिबंधित दवाइयों की इस तरह खुलेआम ब्रिकी से कोई गुरेज नहीं। सुविधा शुल्क के फेर में स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई की जहमत तक नहीं उठा रहा है। बेरोकटोक और सहज रूप से उपलब्ध होने वाली इन प्रतिबंधित दवाइयों के सेवन से युवा लगातार नशे के दलदल में फंसये जा रहा है।
*कौन-कौन सी दवाइयां हो रही हैं*
नशे में प्रयोग खांसी का डाई कफ सिरप, l पेन्सिडन, टौरेक्स, बैनाड्रिल, मैनटेक्स, पिराईटिल, कोडिन, नोविकोव सहित मानसिक रोगियों को दी जाने वाली नींद की गोली नाइट्रो 10 गोली , स्पज्मो कैप्सूल, अल्प्राजोलम,समेत अन्य तमाम दवाइयों का नशे के रूप में प्रयोग हो रहा है। नशेड़ियों के बढ़ते नशे ने किया बाजार से कफ सिरप गायब, युवा वर्ग नशे के लिए जमकर अल्कोहल के विकल्प के रूप में कफ सिरप का प्रयोग कर रहे हैं। इस कारण मेडिकल स्टोरों से कफ सिरप गायब है। हालत यह है कि कफ पीड़ितों को भी कफ सिरप मेडिकल स्टोरों से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
अधिकारियों की माने तो उन्होंने बताया कि चिकित्सक के पर्चे के आधार पर ही दवाइयां दी जाती हैं अगर कोई मेडिकल संचालक बिना डाक्टर के पर्चे के इस तरह की दवाइयां देता है तो यह अपराध है। उस पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।





