कबीरधाम : विकासखंड पंडरिया के ग्राम देवपुरा में शिक्षकों की मनमानी व भोले भाले छात्र छात्राओं से लिया जाता काम सरकार की लगातार प्रयासरत है। की बाल श्रम निषेध किया जाए 14 वर्ष से कम आयु के बालक बालिकाओं को पढ़ने लिखने का अधिकार है । एक ओर प्रशासन शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चो को शाला प्रवेश दिला कर शिक्षा से जोड़ने वाली योजना चला रही लेकिन यहां पंडरिया संकुल की ग्राम देवपुरा की शासकीय प्राथमिक विद्यालय में स्कूल ग्राउंड प्रतिदिन साफ सफाई के रूप कार्य कराया जाता है। शिक्षण संस्थान में शिक्षण कार्य समयावधि के दौरान शिक्षको के द्वारा मोबाइल में व्यस्त पाया जाना बताया जाता है। स्वच्छता दिखावे के लिए साफ सफाई के नाम पर बाल श्रम कानून को पैर के नीचे रख बिना भय विद्यालय की हेड मास्टर अपने शिक्षकीय कार्य में लीन। वहीं आपको बता दें कि मिली जानकारी के अनुसार लोगों से चर्चा करने के दौरान यह बताया गया कि स्कूल में शिक्षक गण समय पर नहीं आते कभी 11बजे तो कभी उसके बाद 12 बजे आना होता है यह भी बात सामने आई हैं की अध्याय समय मे र्मी का पद होने के बावजूद सफाई विद्यार्थियों से कराया जाता है। आखिर क्यों करते हैं ऐसे कार्य क्या संकुल प्रभारी या विकासखंड शिक्षा अधिकारी निरीक्षण कर पाने में अशमर्थ तो नही हो पा रहे।
हमेशा विद्यालय में यहीं सिखाया जाता है कि स्कूल में पढ़ेंगे तो आगे बढ़ेंगे।
सर्व सुविधा यानी शिक्षण कार्य हेतु शिक्षक और सफाई व्यवस्था के लिए सफाई कर्मी। लेकिन फिर भी यहां शासकीय प्राथमिक विद्यालय देवपुरा के स्कूल में बच्चे से धूप में धूल मिट्टी भरी कार्य कराया जाता है।
क्या होगा जब छात्र छात्राओं के माता पिता के संज्ञान इसके बारे में जानकारी होगी कि उनके नन्हे प्यारे, लालन पालन किया हुआ बच्चा पढ़ने स्कूल जाता तो है लेकीन वहा उसे धूल मिट्टी का काम कराया जाता है फिर शिक्षा दिया जा रहा है।
क्या कदम उठाते है शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, बाल श्रम को बढ़ावा देना या संबंधित जिम्मेदार शिक्षकों को कानून , नीति, रीती के तहत कार्यवाही करना ।