
छग/ बालोद _
छत्तीसगढ के बालोद जिला में इन दिनों कुछ कर्मियों का वसूली अभियान धडल्ले से जारी है जहा वसूली अभियान में नाबालिगों को भी नहीं बक्शा जा रहा । कुछ एक कर्मी पूरे विभाग को बदनाम करने की कोशिश जिससे विभाग की विश्वशनीयता पर सवाल खड़े हो रहे है जिसको लेकर जिले के हर एक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है ।
आपको बता दें कि बीते सप्ताह में एक मामला जिसमें शराब बनाने के आरोप में नाबालिग लड़के को उठा लिया गया वहीं पढ़ाई करने वाले लड़के को पट्टा से पीटा भी गाया , पट्टा की मार इतनी जबरदस्त थीं कि हाथ सूज गया जिसके चलते उनको मेडिकल इलाज की आवश्यकता पड़ गईं.।

वहीं विश्वशनीय स्त्रोत मुताबिक वसूली कर्ता कर्मी के चर्चे पूरे क्षेत्र में मशहूर है जो की अवैध कारोबार में संलिप्त लोगो को अपना निशाना बना कर… अपने उच्च आधिकारी के कांधे पर बंदूक रखकर स्वयं की स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए हैं… जिसको लेकर पूरे क्षेत्र में कर्मी के विरुद्ध में जोरों से स्वर उठने लगें है।
वहीं मिली जानकारी मुताबिक़ जिस वक्त किशोर लड़के को उठाया गया उस समय लगभग तड़के सुबह छः बजे के आसपास उठा कर अपने साथ ले गई…. विदित हो कि घटना दरम्यांत किशोर के पालक घर पर नहीं थे. किशोर की मां के इलाज के लिए बाहर ज़िला चिकित्सीय परामर्श हेतु बाहर थे….
जहां पलकों को खबर होते हैं आनन फानन में आस पड़ोस से रकम जुगाड कर कार्यवाही ना करने के एवज में संबंधित कर्मी को रकम देकर मामला को रफा दफा कर लिया गया साथ ही उपहार स्वरूप पट्टा से गहरा वार कर घाव दे दिया।
आगे की घटना क्रम अगले एपिसोड में

क्या कहती है कानून…..
पुलिस बच्चों को गिरफ्तार कर सकती है अगर उन्हें लगे कि उन्होंने कोई अपराध किया है। आमतौर पर, पुलिस स्टेशनों में एक बाल कल्याण संरक्षण अधिकारी ( जेजे अधिनियम 2015 की धारा 107 ) होगा और प्रत्येक जिले और शहर में, कम से कम एक विशेष किशोर पुलिस इकाई होगी।
जब पुलिस किसी बच्चे को अपराध करने के संदेह में गिरफ्तार करती है, तो यह आमतौर पर एक विशेष किशोर पुलिस इकाई द्वारा किया जाना चाहिए। यदि कोई नियमित पुलिस अधिकारी बच्चे को गिरफ्तार करता है, तो बच्चे को तुरंत किशोर पुलिस इकाई, या नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की देखरेख में रखा जाना चाहिए। (जेजे एक्ट 2015 की धारा 10 )।
पुलिस उन बच्चों को भी गिरफ्तार कर सकती है जो किसी ऐसे संस्थान से भाग गए हैं जहां उन्हें जेजे अधिनियम ( जेजे अधिनियम 2015 की धारा 26 ) के तहत रखा गया था , जैसे कि एक अवलोकन गृह (जेजे अधिनियम 2015 की धारा 47) , विशेष गृह या सुरक्षा स्थान (जेजे एक्ट 2015 की धारा 49)।कुछ परिस्थितियों में, उदाहरण के लिए, आदतन चोरों के संबंध में), मजिस्ट्रेट आदेश दे सकता है कि वयस्कों को जेल में डाल दिया जाए यदि वे अच्छे व्यवहार या शांति के लिए बांड निष्पादित नहीं करते हैं। (दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 – धारा 106) . भले ही बच्चों की गिरफ्तारी की अनुमति है, लेकिन मजिस्ट्रेट बच्चों के संबंध में इसी तरह की गिरफ्तारी का आदेश नहीं दे सकता है। (जेजे एक्ट 2015 की धारा 22) है।
बहरहाल मामले में अब किशोर न्याय बोर्ड और किशोर अपराध नियंत्रण संज्ञान लेने की सुचना है
ऐसे में देखना होगा कि मामले को लेकर कर्मी की उच्च अधिकारी अपने विश्वसनीयता और भरोसे को बचाए रखने क्या कार्यवाही करती है….?.?.?.?
चुनेश साहू 7049466638





