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दो सौ करोड़ का जमीन रकबा से अधिक भू-माफीयाओ के सिंडिकेट के द्वारा अवैध विक्रय नामांतरण – विजय वैष्णव                               

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छत्तीसगढ़: कबीरधाम जिला सह कवर्धा तहसील अंतर्गत प.ह.न.-03 मौजा ग्राम, शहर – कवर्धा स्थित बेशकीमती लगानी, शासकीय भूमि में अनैतिक आर्थिक अर्जन के उद्देश्य से तथ्यहीन चैहद्दी अंकन, मिशल नक्शा से भिन्न चालू /डिजिटल नक्शा का क्रियान्वयन, अनेकों मूल खसरा के कुल रकबा से अधिक रकबा विक्रय, कृषि मद की भूमि पर नाली, रोड निर्माण, कालोनाइजर एक्ट के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार राजस्व अधिकारी/कर्मचारी /पटवारी अपने पद के दायित्व निर्वहन में असक्षम हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा-406, 409, 420, 467, 468, 471, 120 – बी,के भागी हैं, जो असंज्ञेय, असमनीय, गंभीर एवं गैर जमानती अपराध हैं। इनका तत्काल निलंबन पश्चात कार्यकाल के समस्त कार्यों का जाॅंच, प्रथम नियुक्ति के समय चल अचल संपत्ति एवं वर्तमान धारित पद, वेतन का मिलान कर नियत समय में उचित वैधानिक कार्यवाही का अनुरोध पांच पृष्ठ के मुल आवेदन मे आरोपो को प्रमाणित करने 175 पृष्ठ के संलग्नक दस्तावेज सहित भूपेश बघेल मुख्यमंत्री, छ.ग.शासन, मोहम्मद अकबर भाई केबिनेट मंत्री, जय सिंह अग्रवाल राजस्व मंत्री, शिवकुमार डहरिया मंत्री नगरीय प्रशासन विभाग एवं विकास विभाग, अमिताभ जैन प्रमुख सचिव छ.ग.शासन,आयुक्त राजस्व संभाग दुर्ग जनमेजय मोहबे जिलाधीश कबीरधाम, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कवर्धा, जिला पंजीयक कबीरधाम, तहसीलदार कवर्धा से 29 मई 2023 को किसान कॉंग्रेस के जिलाध्यक्ष विजय वैष्णव के द्वारा प्रस्तुत किया है जिसमे मुख्य मंत्री निवास कार्यालय से मुख्य मंत्री के निर्देशानुसार एवं उच्च प्रशासनिक अधिकारियो द्वारा तय समय सीमा मे नियमानुसार टीम गठित कर जाँच का आदेश विगत दो माह पूर्व से किया जा चुका है लेकिन शासन के आदेश के बावजूद राजस्व विभाग को किस बात का भय है जो आज तक कार्यवाही प्रारंभ नही किये है क्या भू-माफीयाओ के रसूख के सामने छ.ग.शासन के मुखिया एवं उच्च प्रशासनिक अधिकारियो का आदेश कोई मायने नही रखता जिसके कारण स्मरण पत्र 4/9/2023 को प्रस्तुत किया गया है 
सप्रमाण आरोप पत्र,गैर नियमतः चैहद्दी अंकन
मौके में नक्शा से मिलान कर चैहद अंकन किया जाना था] क्योंकि यह जिला मुख्यालय की कीमती रिहाईशी भूमि हैं] इस क्षेत्र में छोटे टुकड़ों में क्रय-विक्रय होते ही रहता हैं। जबकि खसरा नं.-275/3 का क्रेता-विक्रेता के बताए अनुसार चैहद्दी अंकन किया, भविष्य में किसी वाद-विवाद के लिए क्रेता-विक्रेता जिम्मेदार होंगें अंकन किया तथा तहसीलदार के आदेश दिनांक – 02-03-2020 का हवाला देना। तत्कालीन समय के पटवारी द्वारा अपने पद के दायित्व से विमुख होने का प्रमाण हैं। 
कूटरचित नक्शा निर्मित करना 
खसरा नं. -273 की शासकीय भूमि 274,275,278 कि निजी भूमि का 1910 -11, 1927-28 का मिशल नक्शा वर्तमान चालू, डिजिटल नक्शा तीनों में बहुत अंतर हैं,जो नक्शा कूटरचना किये जाने का प्रमाण हैं। जिसके जांच से बेशकीमती लगानी /शासकीय भूमि में अनैतिक आर्थिक अर्जन के लिए कूटरचना के जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी, व्यक्ति, संस्था का अभिज्ञा तय हैं। 
 षड्यंत्रपूर्वक रकबा से अधिक विक्रय
खसरा नं. 274 का रकबा 6-60 एकड़ हैं। जिसका 44 बटांक हो चुका हैं,बटांकों का योग 6-69 एकड़ हैं, जो खसरा में दर्ज रकबा अधिकार अभिलेख में दर्ज रकबा से 0-09 एकड़ अधिक हैं, जो अवैध हैं। इसी प्रकार खसरा नं. – 263 का रकबा 6-72 एकड़ हैं, जिसका 113 बटांक हो चुका हैं, बटांकों का योग 6-778 एकड़ हैं, जो खसरा में दर्ज रकबा, अधिकार अभिलेख में दर्ज रकबा से 0-06 एकड़ अधिक हैं, जो अवैध हैं, खसरा नं 165 रकबा 4-04 एकड़ कुल बटांक 73 का योग 4-25 एकड़ है जो 0-21 एकड़ अवैध है,खसरा नं 177 रकबा 3-21 एकड़ कुल बटांक 54 बटांको का योग 4-70 एकड़ है, इस प्रकार 1-49 एकड़ अवैध है खसरा नं 72 रकबा 11.20 एकड़ कुल बटांक 133 बटांको का योग 13.62 एकड़ है इस प्रकार 2.42 एकड़ अवैध है खसरा नंबर 269 रकबा 22.15 एकड़ कुल बटांक 108 बटांको का योग 22.96 एकड़ है जो 0.81 एकड़ अवैध है खसरा नंबर 280 रकबा 7.10 एकड़ कुल बटांक 151 बटांको का योग 7.99 एकड़ है जो 0.89 एकड़ अवैध है का अधिक विक्रय, नामांतरण किया गया जो अवैध है ।
प.ह.न.-03 के मौजा ग्राम-कवर्धा प्राइम लोकेशन के भूमि जो अधिक संख्या में बटांक हुये हैं, उनमें से 30 से अधिक खसरा अधिकार अभिलेख 1954-55 में दर्ज रकबा से षड्यंत्रपूर्वक – 02 से 2 एकड़ तक एक खसरा मे बढ़ोत्तरी कर बेंच दिया गया हैं,जिसे अगल-बगल के पड़ती निजी एवं शासकीय खाली भूमि, रोड, तालाब, नाले की शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमित कर कब्जा दिया गया हैं, जो लगभग 25 एकड़ हैं,जो अवैध हैं जिसका वर्तमान बाजार भाव लगभग 200 करोड़ से अधिक हैं। जिसके समस्त दस्तावेज सक्षम अधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर प्रस्तुत किया जावेगा   
● *निजी कृषि प्रयोजन की भूमि पर शासन के राशि से रोड नाली का निर्माण कैसे संभव हुआः-* कवर्धा में प्राइम लोकेशन की भू-स्वामी हक की कृषि भूमि जिन्हें अवैध प्लाटिंग कर छोटे टुकड़ों में विक्रय कर दिया गया हैं। उसमें रोड नाली के लिए छोड़े गये भूमि राजस्व रिकार्ड में कृषि भूमि के रूप में निर्दिष्ट हैं, जिस पर शासन को कोई पूंजीगत लाभ नहीं मिल रहा हैं। फिर भी शासन की राशि से रोड, नाली निर्माण कैसे संभव हुआ। खसरा नं.- 51, 69,82, 84, 86, 88, 162, 163, 164, 165, 173, 177, 263, 269, 271, 274, 275, 276 इत्यादि उदाहरण के रूप में प्रस्तुत हैं,जिसकी मौके में जाँच कर भौतिक सत्यापन कर पंचनामा कर जिम्मेदार राजस्व अधिकारी/व्यक्ति/संस्था पर उचित वैधानिक कार्यवाही का मांग किया गया है 
कालोनाइजर एक्ट की उड़ाई जा रहीं धज्जिया 
कवर्धा में प्राइम लोकेशन की कृषि भूमियों का अवैध प्लाटिंग नक्शा तैयार कर छोटे-छोटे भूखंडों के रूप में जमीन बेंचे गये हैं/बेचे जा रहें हैं, अवैध कालोनियों का निर्माण करते समय शासकीय भूमि, खुली निजी भूमि को अतिक्रमित कर कब्जा दिया जा रहा हैं, ई.डब्लू.एस. के लिए भूमि सुरक्षित नहीं रखी जा रहीं हैं,नगर एवं ग्राम निवेश से अनुमति नहीं ली जा रहीं हैं। छोटे टुकड़ों में विक्रय के लिए उत्तरदायी खातेधाराकों के पास कालोनाइजर लाइसेंस भी नहीं हैं। 
 शासन एवं प्रशासन से वैधानिक माॅंग
तथ्यहीन पटवारी प्रतिवेदन निरस्त किया जावेः-* खसरा नंबर 275/3 के पंजीयन के दस्तावेजों में हुई त्रुटि का सुधार कराकर दस्तावेज दुरूस्त करने अनुरोध प्रस्तुत किया जिसमे पटवारी द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया हैं, जो उक्त गैर नियमतः चैहद्दी अंकन, कूटरचित नक्शा निर्मित, रकबा से अधिक विक्रय के कारण अवैध अतिक्रमित कब्जा धारियों से प्रभावित हैं। यह रिपोर्ट मिथ्या एवं निराधार हैं। जिसे निरस्त कर रिकार्ड दुरूस्तीकरण किया जाने का अनुरोध पीड़ित द्वारा किया गया है      
        निराधार सीमांकन प्रतिवेदन को निरस्त कर पुनः सीमांकन किया जावें :-* संबंधित क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत सीमांकन प्रतिवेदन में आवेदित खसरा 275का सीमांकन नहीं किया हैं, फिल्ड बुक भी नहीं बनाया हैं मात्र वर्तमान अभिलेखों का उल्लेख किया गया हैं, जो गैर नियमतः चैहद्दी अंकन वर्तमान में प्रचलित कूटरचित नक्शा निर्मित, रकबा से अधिक विक्रय के कारण अवैध अतिक्रमित कब्जाधारियों से प्रभावित हैं,जो ग्राह्य नहीं हैं यह कि विधिवत सीमांकन हेतु आवेदन जिसका मूलप्रति चालान टिकट सहित तहसीलदार कवर्धा को देय प्रति में संलग्न किया गया हैं। भू-राजस्व संहिता 1959,धारा 129 पूर्व में सीमांकन किया गया पुनः सीमांकन के लिए आवेदन चलाने योग्य होना पश्चात वर्ती वाद हेतु क के कारण सीमांकन के लिए पुनः आवेदन स्वीकार कर आदेश जारी किया जाने का अनुरोध पीड़ित पक्ष द्वारा किया गया है 
निराधार दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण प्रक्रिया में रोक लगाकर न्यायालय में दर्ज करने योग्य पारित आदेश निरस्त किया जाने का अनुरोध पीड़ित पक्ष द्वारा किया गया है।
तत्कालीन समय के तहसीलदार की भूमिका विश्वास योग्य नहीं
तत्कालीन समय के तहसीलदार पूर्ण रूप से आंख बंद कर 02-03-2020 को गैर नियमतः चैहद्दी अंकन के लिए पटवारी को निर्देश, तथ्यहीन पटवारी प्रतिवेदन, निराधार सीमांकन प्रतिवेदन को स्वीकार कर नामांतरण की प्रक्रिया पर आवेदक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बगैर रोक लगाने से अनावश्यक राजस्व प्रकरण सृजित होने के कारक हैं। अपने दायित्व के निर्वहन से विमुख होने का प्रमाण हैं। 
नौकरी जाने का भय समाप्त हो चुका है 
प्रथम नियुक्ति के प्रथम वेतन मान से अंतिम पदोन्नति के अंतिम वेतन मान के पैमाना के बराबर रकम सेवाकाल के प्रत्येक पांच वर्ष मे अनैतिक आर्थिक अर्जन किये जाने मे जिले के राजस्व के कुछ अधिकारी सफल हो चुके है तो सिलसिला निकल पड़ा है तो नौकरी जाने का भय किसे है भ्रष्टाचार कि सनक इस कदर है कि अधिकारी के उपर दो-चार विभागीय जांच,एक- दो बार आई टी का छापा आज के समय मे अधिकारियो के लिए गर्व का विषय है विभाग मे उतनी ही चलती है यह आज का सत्य है।
उपरोक्त समस्त कंडिकाओं में लगाए गए आरोपों के अवलोकन एवं आरोपों को सिद्ध करने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध होता हैं कि उक्त राजस्व के अधिकारी अपने पद के दायित्व निर्वहन में पूर्ण रूप से संनिष्ठ नहीं हैं , इसलिए उक्त अधिकारियों को तत्काल निलंबन कर कार्यकाल के कार्यों का जांच किया जावे,अन्यथा उनके पद में बने रहने से उचित निष्पक्ष जांच की संभावना नहीं हैं। जांच को प्रभावित करने रि नंबरिंग के दस्तावेज गायब कर दिए गए है 
आपसे प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर राजस्व विभाग के अधिकारियो द्वारा मनमानी पुर्वक पीड़ित के खसरा नंबर 275/3 के उलझाए गए दस्तावेज, तथ्यहीन पटवारी प्रतिवेदन को निरस्त कर लंबित नामांतरण की प्रक्रिया को पूर्ण कराकर रिकार्ड दुरूस्त कराने, निराधार सीमांकन प्रतिवेदन निरस्त कर सीमांकन हेतु उल्लेखित किये गये दस्तावेजों के आधार पर नियत समय में सीमांकन कराने आदेश जारी किया जाने की मांग किया गया है।

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