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डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकिंग के लिए, दीपक यादव को मिला सम्मान

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देश के हृदय स्थल भोपाल में, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
छत्तीसगढ़/कवर्धा : दीपक यादव छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के ग्राम मड़मड़ा के निवासी है। दीपक विगत 8 सालो से बाल अधिकार संगठन संस्था में बच्चों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण , स्वच्छता, जैसे मुद्दों पर एक वालेंटियर और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में शासन प्रशासन से जुड़कर काम करते आए है दीपक एक निम्न परिवार से ताल्लुक रखते है इनके पिता गांव में गाय चराने का काम करते है और माता खेती मजदूरी का काम करती है।

दीपक को बचपन से ही समाज सेवा में रुचि रहा है इन्होंने अनेक समाज सेवी संस्थाओं के साथ जुड़कर काम कर चुके है इन्हे पत्रकारिता और आर्टिकल लिखना बहुत पसंद है.
मार्गदर्शन
बाल अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमन सिंह ठाकुर और पैरा लिगल वॉलेंटियर एवं सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत यादव का मार्गदर्शन सहयोग मिला. स्कूली लाइफ से दीपक अपने दोस्तों के साथ वर्ष 2016 में बाल मित्र, बाल पंचायत करके समूह बनाया था जो आगे चलकर वर्ष 2018 में सामाजिक बाल अधिकार संगठन के नाम से पंजीकृत कराया गया.
चंद्रकांत यादव जो की गांधी ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष है इनके मार्गदर्शन द्वारा ग्रीन हब फेलोशिप के बारे में जानकारी मिली।
इंटरव्यू और रुचि के अनुसार दीपक का चयन इस फेलोशिफ में हुआ , जहां इन्होने जुलाई 2022 से जुलाई 2023 तक फिल्म निर्माण, फोटोग्राफी, और वीडियोग्राफी के कौशल प्राप्त किए।
अब इनका उद्देश्य है कि जैव विविधता, शिक्षा, आदिवासी संस्कृति, पर्यावरण, जैविक खेती, रोजगार जैसे मुद्दों और चुनौतियों पर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाना चाहते है ताकि विलुप हो रही भाषा, संस्कृति, पारंपरिक खेती, वन्य जीवों को संरक्षित करने में शासन प्रशासन की मदद कर सके जिसके लिए हमारा देश विश्व गुरु कहलाता है.
ग्रीन हब संस्था
ग्रीन हब परियोजना डॉक्यूमेंटी फिल्म के माध्यम से संरक्षण और सामाजिक परिवर्तन के लिए ग्रामीण और आदिवासी युवाओं के लिए 10 महीने की फेलोशिप है। जहां युवाओं को निशुल्क आवास और भोजन एवं फेलोशिप के दौरान यात्रा व्यय भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराती है .
2021 में ग्रीन हब ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के युवाओं के साथ शुरुआत की और अब इसका विस्तार महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक हो गया है। फेलोशिप युवाओं को डाक्यूमेंट्री के तकनीकी कौशल के साथ-साथ पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण, खेती, प्रकृति से जुड़ी आजीविका और उद्यम, स्वदेशी ज्ञान, स्थानीय शासन प्रक्रियाओं के साथ जुड़ाव, युवा नेतृत्व और अन्य सामाजिक परिवर्तन के व्यावहारिक ज्ञान के साथ सशक्त बनाती है।

संस्था के संस्थापक रीटा बैनर्जी एवं प्रोग्राम डारेक्टर तथा आयोजक और महाशक्ति सेवा केंद्र, भोपाल की अध्यक्ष पूजा अयंगर ने बताया कि फेलोशिप के दौरान हम ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को सिखाते हैं कि कैसे अपने समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं और संस्कृतियों को आगे लाने और संरक्षित करने के लिए कहानी कहने को एक माध्यम के रूप में उपयोग किया जाए। ग्रीन हब वर्ष 2023 मध्य भारत का दूसरा बैच था. कार्यक्रम में देश के अनेक संस्थाओं से लोग आए थे सभी ने अपने अपने काम और अपने विचारो को रखा और लोक वाद्य गायन प्रस्तुतियां, और फोटोग्राफी प्रदर्शनी को भी शामिल किया गया था।

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