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राइस मिलों की जांच की आवश्यकता, होती है हेरा ~ फेरी

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कवर्धा, कबीरधाम जिला में राइस मिलरो की जलवा नजर आ रहा है । कस्टम मिलिंग के जरिए उपार्जन केंद्र से धान का उठाव कर बदले में चावल जमा करना होता है । उपार्जन केंद्र से धान का उठाव , परिवहन और बदले में चावल जमा करने के बीच कई तरह का खेल खेला जा रहा है । इस बिच में खाद्य विभाग की बड़ी जिम्मेदारी होता है लेकिन सब खेल मिलीभगत से हो रहा है । यदि राइस मिलों की आवक, जावक ,स्टॉक पंजी सहित वहा संधारित अन्य पंजियो की बारीकी से जांच की जाए तो तरह तरह की गड़बड़ी सामने आने की संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता ।
अन्य राज्य से खरीदते है चावल
कबीरधाम जिला के राइस मिलर उचित मूल्य की दुकान का संचालन करने वाले दुकान से चावल की अफरा तफरी तो करते ही है साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में गल्ला व्यवसाय करने वाले व्यापारियों से भी लोकल चावल भी खरीदते है उसके अतरिक्त अन्य राज्यो से कम दाम पर खंडा युक्त चावल खरीदकर कस्टम मिलिंग में जमा कर देते है ।
खुला बाजार में बेचते है धान
छत्तीसगढ सरकार के द्वारा किसानों के धान को समर्थन मूल्य पर महंगे दामों में खरीदा जाता और राशनकार्ड धारियों को निःशुल्क चावल दिया जा रहा है जिसके चलते धान की खरीदी निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा मात्रा में होता है । राइस मिलर के द्वारा कस्टम मिलिंग के तहत उठाए गए धान को राइस मिलर संचालकों के द्वारा ओपन मार्केट में महंगे दामों बेच दिया जाता है जिससे उन्हें धान से चावल बनाने के बीच में होने वाले खर्च की बचत होता है । मजदूरी और बिजली की बिल भी बच जाता है और स्थानीय स्तर पर 17से18 रूपए किलो मे ओपन मार्केट से चावल मिल जाता है जिससे धान के बदले चावल जमा कर देते है ।
मिल में संधारित पंजीयो की जांच की आवश्यकता 
कस्टम मिलिंग के कार्य में लगे कबीरधाम जिला के सभी राइस मिलर की स्टॉक पंजी के अलावा वहा संधारित होने वाले सभी प्रकार की पंजियों की गहन जांच की आवश्यकता है । राइस मिलर के द्वारा कब कब कितना डी ओ के माध्यम से उपार्जन केंद्र से धान का उठाव , परिवहन किए और उसके विरुद्ध कब कब कितनी मात्रा में चावल जमा किए साथ ही उनके स्टॉक पंजी में कितना धान शेष है उसका भौतिक सत्यापन करने से सभी तरह का खेल सामने आ जाएगा ।
नियमित निरीक्षण की कमी
खाद्य विभाग के पास निरिक्षक सहित अन्य स्टाफ का कमी है । खाद्य निरीक्षक के पास काम की अधिकता होता है जिसके चलते न तो उचित मूल्य का निरीक्षण कर पाते न ही पेट्रोल पंप और राइस मिल का । जिसका बेजा लाभ कस्टम मिलिंग कार्य में लगे मिलर तरह तरह का खेल खेलने में लगे हुए है ।

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