
लगभग 2000 कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर दुर्ग के मानस भवन में डटे हुए हैं। कर्मचारियों के इस आंदोलन को बड़ा राजनीतिक समर्थन तब मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया, विधायक संगीता सिन्हा, पूर्व विधायक कुंवर सिंह निषाद, कांग्रेस नेत्री नीता लोधी सहित कई वरिष्ठ नेता हड़ताली कर्मचारियों के मंच पर पहुंचे।।
दुर्ग में सहकारी समिति कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी हैं।पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत कई नेता समर्थन देने पहुंचे थे,कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर को भेज दिया। उनका कहना है कि सरकार जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, हड़ताल जारी रहेगी। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर सहकारिता तंत्र को कमजोर करने की दिशा में कदम उठा रही है।कर्मचारियों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी जायज मांगें नहीं मानी जातीं,हड़ताल जारी रहेगी।वहीं मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार के गलत निर्णयों का सीधा नुकसान किसानों और समिति कर्मचारियों दोनों को हो रहा है। उन्होंने एग्रो स्टॉक में पंजीयन की अनिवार्यता को सरकार का तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि इससे लाखों किसान धान बेचने से वंचित हो जाएंगे। बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि सहकारिता व्यवस्था को खत्म कर निजी कंपनियों के लिए रास्ता साफ किया जा रहा है।
भूपेश बघेल ने बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटरों का वेतन 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने किया गया था, जिसे वर्तमान सरकार ने वापस 6 महीने कर दिया है। उन्होंने ऑपरेटरों पर की जा रही रिकवरी और FIR को अनुचित बताया। उनका कहना है कि पिछले वर्ष का धान अभी तक कई सोसाइटी में पड़ा है जिसका नुकसान ऑपरेटरों पर डालना गलत है।उन्होंने यह भी कहा कि धान खरीदी की तैयारी में भारी अव्यवस्था है। मैंने खुद टोकन लेने भेजा, बिजली गुल होने से कोई टोकन नहीं मिला। सरकार किसानों को टोकन लेट खरीदी के लिए दे रही है। उन्होंने पूछा कि 20-25 साल के अनुभवी ऑपरेटरों की जगह पटवारी और तहसीलदार धान खरीदी कैसे संभालेंगे।।





