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कांगेर घाटी का रंगीन अवलोकन – बटरफ्लाई मीट के लिए पंजीयन 20 नवंबर तक

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जगदलपुर।

घने जंगलों, कल-कल बहती धाराओं और जैव विविधता के अनुपम खजाने से भरी कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान एक बार फिर जीव विज्ञान प्रेमियों, प्रकृतिविदों और फोटोग्राफी शौकीनों के लिए खास आयोजन लेकर तैयार है। प्रकृति संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित होने वाला “बटरफ्लाई मीट 2025” इस वर्ष भी रंगीन तितलियों की दुनिया को नजदीक से समझने और अनुभव करने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम के लिए प्रतिभागियों का पंजीयन 20 नवंबर तक किया जा सकेगा।

तितलियों की दुनिया में विशेष अध्ययन का अवसर

कांगेर घाटी एशिया के उन प्रमुख वन क्षेत्रों में शामिल है, जहाँ तितलियों की सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इन तितलियों का रंग, आकार, पंखों की बनावट और उनका व्यवहार प्रकृति के रहस्यों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार के आयोजन में तितलियों के आवास स्थल, प्रवास मार्ग, संरक्षण तकनीक, वैज्ञानिक अवलोकन और जैव विविधता के महत्व पर विस्तृत कार्यशालाएँ आयोजित होंगी।

सदियों पुराने वृक्ष—समय की अनकही कहानियाँ

कांगेर घाटी की खूबसूरती केवल तितलियों तक सीमित नहीं है। यहाँ के सदियों पुराने वृक्ष आज भी समय की अनकही कहानियाँ फुसफुसाते हैं। उनके तनों पर उभरी आकृतियाँ, वर्षों की परतों से झाँकती उम्र और हवा में डोलती उनकी शाखाएँ इस क्षेत्र की ऐतिहासिक व प्राकृतिक विरासत का सजीव प्रमाण हैं।

वन्य विशेषज्ञ बताते हैं कि इन वृक्षों की छाँव में ही तितलियों की कई विशिष्ट प्रजातियाँ अपनी पीढ़ियाँ बढ़ाती हैं और इसी परंपरा ने कांगेर घाटी को ‘तितलियों का स्वर्ग’ जैसी पहचान दी है।

प्रकृति के कैनवास पर तितलियों की रंगीन कविताएँ

कांगेर घाटी की चट्टानों, पगडंडियों और जलधाराओं के बीच तितलियाँ उड़ते हुए मानो प्रकृति के कैनवास पर रंगीन कविताओं के झरने सी बिखर जाती हैं। उनके पंखों पर उकेरे गए प्राकृतिक डिज़ाइन और उड़ान की लयबद्ध शैली किसी किसी कलाकार की अनंत कल्पना से कम नहीं लगती।

इसी कारण फोटोग्राफर और कलाकार इस मीट को एक अद्वितीय अवसर मानते हैं, जहाँ प्रकृति स्वयं एक जीवंत चित्र बनकर सामने आती है।

प्रकृति प्रेमियों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद

वन विभाग का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार प्रतिभागियों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। इसमें विद्यार्थियों से लेकर शोधकर्ताओं, नेचर गाइड्स, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं तक सभी श्रेणियों के लोग भाग लेंगे।

प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के साथ फील्ड विजिट, व्याख्यान, प्रशिक्षण और तितली पहचान कार्यशाला का लाभ मिलेगा।

पंजीयन 20 नवंबर तक

इच्छुक प्रतिभागी वन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से 20 नवंबर तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। आयोजकों ने बताया कि स्थान सीमित हैं, इसलिए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर चयन किया जाएगा।

कुल मिलाकर, कांगेर घाटी के घने जंगल इस वर्ष फिर से रंगीन पंखों की मधुर सरसराहट से गुलजार होने वाले हैं। तितलियों का यह उत्सव न केवल प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव-विविधता संरक्षण का संदेश भी देगा।प्रकृति और विज्ञान का यह सुंदर संगम निश्चित ही प्रतिभागियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव साबित होगा

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