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जिला महिला एवं बालविकास कबीरधाम थूथी साबित हो रही, कार्यशैली पर सवाल

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कवर्धा, कबीरधाम जिले में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और कुपोषण से दूर रखने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। लेकिन जिले में आज भी कई ऐसे केंद्र हैं। जो किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। आनगबाड़ी केंद्रों के लिए महिला बाल विकास विभाग के पास स्वयं का भवन नही है। इन केंद्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका जाकर बच्चों को पोषण आहार और प्रारंभिक शिक्षा दे रहे हैं।
केंद्रों में 89 हजार बच्चे हैं पंजीकृत
जिले में 1706 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां पर 89 हजार से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं लेकिन स्वयं के भवन व सुविधाओ के अभाव में आंबनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहें है।क्योंकि जिले में कहने के लिए तो 1706 आंगनबाड़ी केंद्र हैं लेकिन स्वयं का भवन 1477 केंद्र के लिए है। बरसात में कुछ भवनों में पानी का रिसाव होने के कारण वर्तमान में 1399 केंद्र ही स्वयं के भवन में संचालित हो रहा है । कार्यक्रम अधिकारी से मिली जानकारी अनुसार 229 आंबनबाड़ी केंद्र के लिए भवन की कमी है। भवन की कमी के साथ कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ने की कयावद अधूरी है हालांकि आंगनवाडी कार्यकर्ता सहायिका ने जंग लड़ने में पीछे नहीं हट रहे हैं।
अभाव में बच्चों की देखरेख
कबीरधाम जिले के आनगबाड़ी केंद्रों बच्चे पहुंचते हैं। खेल खेल में शिक्षा व पोषण लेने लेकिन केंद्रों में समस्याओं की भरमार है। जिले के लगभग 577 आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली की व्यवस्था नहीं होने से हजारों बच्चे उमस व गर्मी से परेशान होते रहते हैं। 1477 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 900 में बिजली की व्यवस्था है। जबकि 577 केंद्र बिजली विहीन है। पिछले वर्ष शासन-प्रशासन की ओर से विद्युतविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली व्यवस्था की बात कहीं थी। जो अब तक पूर्ण नहीं हो सकी है।
समस्याओं के बीच बच्चों का पोषण
कबीरधाम जिले में 1706 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है लेकिन 150 आनगबाड़ी केंद्र किराए के मकान में चल रहे हैं। 277 आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय नही है। इसके साथ ही 577 आंगनबाड़ी केंद्र में बिजली नही है। तो वहीं लगभग 100 केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था ही नहीं है। इन सबके बीच जिला प्रशासन आंगनबाड़ी के केंद्रों का संचालन कर रहा हैं। वहीं केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार की भी कोई मॉनिटरिंग करने वाला नहीं है बच्चों को पानी युक्त सोयाबीन आलू की सब्जी या खिचड़ी खिलाकर सन्तुष्ट घर भेज दिया जाता है।
किराए व उधार के भवन में संचालित हो रहे केंद्र
जिले में कुल 229 आंगनबाड़ी केंद्र के लिए स्वयं के भवन की कमी है। इसके चलते ही जिले के 150 केंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। जबकि लगभग 80 आंगनबाड़ी केंद्र उधार के भवन व मकान, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक भवन या फिर दान के भवन या कमरे में संचालित हो रहे हैं। मतलब जैसे तैसे काम चल रहा है।
केंद्र के बच्चे खुले में जा रहे शौच
कबीरधाम जिला खुले में शौचमुक्त जिला है, लेकिन यहां के बच्चे खुले में शौच जाते हैं वह भी आंगनबाड़ी केंद्र के ही बच्चे। जिला प्रशासन द्वारा दी गईं जानकारी के अनुसार 277 आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय की सुविधा नहीं है। जबकि 150 केंद्र किराए के भवन व अन्य स्थानों पर संचालित हो रहे हैं उसमें भी नाममात्र केंद्रों में ही शौचालय की सुविधा है। मतलब 250 से अधिक केंद्रों में शौचालय ही नहीं है।
दो हजार बच्चे गंभीर कुपोषित
कबीरधाम जिले में नौ एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी, 63 सेक्टर पर्यवेक्षक होने के बावजूद यहां पर कुपोषण की संख्या कम होने का नाम ही नही ले रहा है। जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र की संख्या भी पर्याप्त है बावजूद कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा है वर्तमान में लगभग 2000 बच्चे गंभीर कुपोषित है ।

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