पंडरिया- बिरकोना संकुल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला के केशलीगोड़ान में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का 136वी जयंती 03अगस्त 2022को मनाया गया।इस अवसर पर संस्था के प्रधान पाठक शिवकुमार बंजारे ने गुप्त जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 03अगस्त 1886 को चिरगांव झांसी उत्तर प्रदेश में हुआ। गुप्त जी का वास्तविक नाम मिथिलाधिप नंदनशरण था। साहित्य जगत में “दद्दा” नाम से संबोधित किया जाता था। उनकी कृति ‘भारत भारती’ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान व्यापक प्रभावशाली सिद्ध हुई थी। इसी कारण महात्मा गांधी ने उन्हें राष्ट्रकवि की पदवी दी थी। हिंदी साहित्य के इतिहास में वह खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि माने जाते थे। गुप्त जी की बाल कविताएं काफी रोचक है। उन्होंने दो महाकव्य, उन्नीस खण्डकाव्य,काव्यगीत, नाटिकाएं आदि लिखी। शिक्षिका श्रीमती लता चांदसे ने बच्चों को गुप्त जी द्वारा रचित कविता “नर हो न निराश करो मन को” नामक कविता सुनाई तथा शिक्षक सत्येन्द्र चांदसे ने एल ई डी स्मार्ट टीवी पर गुप्त जी के बाद कविताओं को दिखाया। अवसर पर शिक्षिका श्रीमती लता चांदसे एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।