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निःशुल्क जांच शिविर से मिलेगी राहत की उम्मीद, सिकल सेल व थैलेसीमिया मरीजों के लिए बड़ा अवसर

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया मेजर जैसी गंभीर आनुवांशिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और बच्चों के लिए 6 मई को एक विशेष निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर उदय चिल्ड्रन हॉस्पिटल में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वेयरहाउस रोड स्थित अस्पताल परिसर में आयोजित होगा।

सोमवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों की टीम—डॉ. राकेश साहू, डॉ. अभिनव साहू, डॉ. पी. आर. चौधरी और डॉ. अशोक मेहता—ने शिविर की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें सिकल सेल और थैलेसीमिया मरीजों के लिए निःशुल्क जांच के साथ विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।

डॉक्टरों ने बताया कि शिविर में मरीजों और उनके परिवार (भाई-बहन व माता-पिता) के लिए महंगी मानी जाने वाली HLA टाइपिंग जांच भी पूरी तरह निःशुल्क की जाएगी, जिसकी सामान्य कीमत 12 से 15 हजार रुपये तक होती है। इसके साथ ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) से संबंधित मार्गदर्शन अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली के विशेषज्ञों द्वारा दिया जाएगा।

शिविर में अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. गौरव खारिया एवं उनकी टीम विशेष रूप से मौजूद रहेगी, जो मरीजों की जांच कर उचित उपचार संबंधी सलाह प्रदान करेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. राकेश साहू ने बताया कि थैलेसीमिया मेजर के मरीजों का ऑपरेशन अपोलो दिल्ली में निःशुल्क संभव हो सकता है। वहीं सिकल सेल रोगियों को राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत 18 से 20 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में सिकल सेल एनीमिया एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत राज्य में अब तक 1.70 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें करीब 3.38 लाख लोग कैरियर (Trait) के रूप में चिन्हित हुए हैं, जबकि 27,600 से अधिक मरीजों में रोग की पुष्टि हुई है। एक करोड़ से अधिक लोगों को जेनेटिक स्टेटस कार्ड भी वितरित किए जा चुके हैं।

डॉक्टरों ने बताया कि सिकल सेल रोग के उपचार में अब पारंपरिक दर्द प्रबंधन से आगे बढ़ते हुए हाइड्रॉक्सीयूरिया, क्रिज़ानलिज़ुमैब और वोसेलोटोर जैसी आधुनिक दवाओं का उपयोग किया जा रहा है। गंभीर मामलों में रक्त आधान और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट प्रभावी विकल्प साबित हो रहे हैं, जबकि जीन थेरेपी और जीन एडिटिंग जैसी तकनीकें भविष्य में स्थायी इलाज की दिशा में उम्मीद जगा रही हैं।

राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत 0 से 40 वर्ष आयु वर्ग, विशेषकर आदिवासी समुदाय में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है।

आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से अपील की है कि वे इस निःशुल्क शिविर का लाभ उठाएं और जरूरतमंद मरीजों तक इसकी जानकारी अवश्य पहुंचाएं।

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