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गृह मंत्री के गृह जिले में आबकारी खेल! छोटे कोचियों पर डंडा, बड़े संरक्षणधारियों पर मेहरबानी?

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कवर्धा, कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री के गृह जिले कबीरधाम में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। विभाग एक ओर 19 लीटर अवैध शराब जब्त कर 2 लोगों की गिरफ्तारी का ढोल पीट रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले भर में खुलेआम कोचियों तक शराब पहुंचने के पीछे किसका संरक्षण है, यह सबसे बड़ा प्रश्न बन गया है। जनता पूछ रही है कि जब दुकानों में कैमरे लगे हैं, स्कैनिंग व्यवस्था है, निगरानी तंत्र सक्रिय बताया जाता है, तो आखिर शराब दुकानों से निकलकर गांव-गांव कोचियों तक कैसे पहुंच रही है?

सूत्रों के अनुसार जिले में शराब बिक्री का समानांतर तंत्र लंबे समय से सक्रिय है, जहां गरीब और छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई दिखाकर विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा है, जबकि बड़े स्तर पर अवैध कारोबार करने वालों पर रहस्यमयी चुप्पी साध ली जाती है। आरोप है कि जहां से मोटी रकम की आवक होती है, वहां कार्रवाई की फाइलें ठंडी पड़ जाती हैं और जहां से “सेटिंग” नहीं होती, वहां दबिश देकर आंकड़े चमकाए जाते हैं।

आबकारी विभाग ने जानकारी दी है कि अप्रैल माह में 2 प्रकरण कायम कर 19.08 लीटर शराब जब्त की गई। 22 अप्रैल को ग्राम झिरौनी में एक दुकान से शराब बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। लेकिन विभाग यह बताने से बचता नजर आया कि जब शराब दुकानों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत बेची जाती है, तब इतनी मात्रा में शराब गांव के अवैध विक्रेताओं तक आखिर पहुंची कैसे? कौन कर्मचारी, कौन तंत्र और किसकी शह पर यह खेल चल रहा है?

जिले में कई स्थानों पर ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी दुकानों से खरीदी गई शराब बाद में अवैध रूप से ऊंचे दामों पर बेची जाती है। इससे शासन को राजस्व का नुकसान तो होता ही है, साथ ही सामाजिक वातावरण भी खराब हो रहा है। गांवों में गरीब परिवार शराबखोरी से बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल प्रेस नोट जारी कर कार्रवाई का दिखावा करने में व्यस्त है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आबकारी अधिकारी स्वयं सख्ती के दावे कर रहे हैं, तो फिर कोचिया तंत्र अब तक समाप्त क्यों नहीं हुआ? क्या विभागीय मिलीभगत के बिना यह संभव है? यदि नहीं, तो जिम्मेदारों पर विभागीय जांच और कठोर कार्रवाई कब होगी?

कबीरधाम की जनता अब सिर्फ छोटी-मोटी जब्ती नहीं, बल्कि पूरे शराब सिंडिकेट का पर्दाफाश चाहती है। वरना यह माना जाएगा कि गरीबों पर डंडा चलाकर और बड़े खेलाड़ियों को बचाकर आबकारी विभाग मलाई काटने में लगा है।

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