
कवर्धा। शासन-प्रशासन जहां एक ओर आम नागरिकों को आगजनी से बचाव, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सीख देता है, वहीं दूसरी ओर वन विकास निगम कवर्धा के सरकारी कार्यालय परिसर से सामने आई यह तस्वीर सरकारी तंत्र की चौंकाने वाली लापरवाही उजागर करती है। कार्यालय परिसर में सूखी झाड़ियों, पत्तों और कचरे की सफाई के नाम पर खुलेआम आग लगा दी गई, जिससे विभागीय जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
तस्वीर में स्पष्ट देखा जा सकता है कि कार्यालय की बाउंड्री के भीतर पेड़ों, झाड़ियों और सूखे कचरे के बीच आग धधक रही है। यह आग यदि अनियंत्रित हो जाती तो सरकारी भवन, दस्तावेज, वृक्ष संपदा तथा आसपास के क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंच सकता था। इसके बावजूद जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा ऐसी लापरवाही बरतना अक्षम्य कृत्य माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो विभाग जनता को वन संरक्षण, आग से बचाव और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश देता है, क्या वही विभाग खुद नियमों को राख करने पर उतारू है? क्या सरकारी दफ्तर अब सफाई के नाम पर आग लगाने का केंद्र बन चुके हैं? यदि आम नागरिक ऐसा करते पाए जाएं तो उन पर कार्रवाई होती है, फिर सरकारी दफ्तरों में यह ढिलाई क्यों?
इस घटना ने यह भी संकेत दिया है कि विभाग के भीतर निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर है। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं होता, तो बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता था। ऐसे कृत्य न केवल शासन की छवि धूमिल करते हैं, बल्कि जनता के बीच यह संदेश भी देते हैं कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं।
अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें, जिम्मेदार कर्मचारियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करें तथा सरकारी परिसरों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। अन्यथा ऐसी लापरवाही किसी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है।





