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पंडरिया बंद : 21 अगस्त को एस सी के 101और एसटी के 145 जातियां भारत बंद में होंगे शामिल, अनुसूचित जाती, जनजाति करेगे बंद 

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संवादाता: अजय जांगड़े 
पंडरिया: पिछले समय पर माननीय उच्चतम न्यायालय के दिए गए आदेश आरक्षण पर आरक्षण, क्रिमिलेयर पर अनेक सवाल खड़े हो रहे। जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के हितकारी साबित नहीं होने का अंदेशा है। जिसके विरोध में पूरे भारत देश भर में बंद का आगाज किया जा रहा है। ठीक उसी तरह पंडरिया विकासखंड के क्षेत्र में रहवासी अनुसूचित जाति, जनजाति के सभी जन व इस कैटेगरी में आने वाले अनुसूचित जाति में 1 क्रमांक से 44 क्रमांक तक 101 जाति शामिल हैं वही अनुसूचित जन जाति में 1 से 42 क्रमांक तक में 145 जातियां  आती हैं जो आंदोलन में शामिल होंगे। 
21 अगस्त को भारत बंद में कबीरधाम जिले के पंडरिया बंद का आह्वान किया गया है जिसमे क्षेत्र के सभी व्यापारी बंधु, अशासकीय संस्थान, सहित अन्य निजी व्यवसायीयो से निवेदन किया गया है की वे भी इस महाबंद का हिस्सेदारी बन श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को दिए गए आवेदन में अंकित अल्टीमेट समय निर्धारित के अनुरूप अपनी अपनी संस्थानों को बंद रखेंगे। जिससे सौहार्द्र पूर्वक ग्राहक एवं दुकानदार की समानता भी बने रहे जिससे किसी भी प्रकार की समस्या से बचा भी जा सके।
क्या है क्रिमिलेयर कानून जिसे माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फैसल दिया है कोटा के अंदर कोटा 
दरअसल, कोटा के अंदर कोटा से मतलब एक अलग आरक्षण व्यवस्था लागू करना है। इसके तहत यह सुनिश्चित करना होगा कि एससी-एसटी के अंदर जो जातियां ज्यादा जरूरतमंद हैं और जिन्हें भेदभाव का शिकार होना पड़ता है, उसे ज्यादा लाभ मिले।
जबकि अभी आजादी के 77 साल के बाद भी इस समाज को उतना लाभ नहीं दे पाई है सरकार,और ना ही बैकलॉग को पूरा कर पाई है सरकार,आज एससी , एसटी के बजट का पैसा अन्य कार्यों में खर्च करके इन वर्गों के हालात सुधारने में नाकाम रही है सरकार ,आज भी ऐसी स्थिति है की सरकार आंकड़े जारी नही करते, जनगणना नही कर रही है,फिर भी किस सर्वे के आधार पर यह असंवैधानिक कार्य किया जा रहा है।
जिसके चलते सामाजिक व्यवस्था को लेकर उपेक्षित न हो के कारण माननीय उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय को अस्वीकार करते हुए इस तरह का उसके विरोध में अपने हित के आंदोलित होना पड़ा और हर हाल में इस निर्णय को निरस्त करना होगा इस उद्देश्य से 21 अगस्त 2024 को महाबंद का ऐलान कर बंद किया जाएगा। इस महाबंद में सभी अनुसूचित जाति व जनजाति के लगभग 246 जाति शामिल होंगे और वहीं इसके आयोजनकर्ता तथा कार्यकर्ता रहेगें।

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