पांडातराई: सभी धर्मों और मजहबों में अपनी अपनी रीति रिवाज के अनुसार अपने इष्ट देव या गुरुओं का अपने तरीके से सदियों गुजर गए प्रथा को निभाते हुए चले आ रहे हैं। गुरुघासी दास बाबा जो सतनाम पंथ के संस्थापक एवं सतनामी समाज के इष्ट देव तथा गुरु और भगवान भी है। जिनके द्वितीय पुत्र गुरु बालकदास का जन्म 18 अगस्त 1805 ई. को गिरौदपुरी में हुआ था। बाबा गुरु घासीदास व सफुरा माता के द्वितीय पुत्र राजा गुरु बालक दास जी महान क्रांतिकारी, समाज सुधारक,युग पुरुष और मानवाधिकार के लिए सतनामी आंदोलन के प्रणेता व सतनाम धर्म के संस्थापक तथा उत्तराधिकारी थे।
अंग्रेजी हुकुमत समय काल में इन्हे गवर्नर लार्ड इग्नू ने इनके पराक्रमी योद्धा और वीरता को देख राजा की उपाधि देकर राजा घोषित किया था। राजा गुरु बालक दास जी सतनामी आंदोलन के महानायक व प्रमुख सेनापति,प्रसिद्धि का कारण लोक-समाज के भूमि -संपत्ति, स्वाभिमान और मानव अधिकार की रक्षा करते हुए अपनी जान की कुर्बानी दे दिए थे।