
भिलाई से बड़ी राजनीतिक खबर
भिलाई। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों कथित एमएमएस प्रकरण को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी क्रम में भिलाई नगर निगम के पूर्व सभापति एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र अरोरा ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले को संदेहास्पद बताया है। उन्होंने इस प्रकरण की निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।
राजेंद्र अरोरा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि विधायक देवेंद्र यादव इस मामले में केवल “घड़ियाली आंसू” बहा रहे हैं। यदि उन्हें वास्तव में जांच एजेंसियों पर भरोसा होता, तो वे समय रहते पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराते। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने जांच प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया और बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद समय पर उपस्थित नहीं हुए।
नोटिस के बाद भी देरी पर उठे सवाल
अरोरा ने बताया कि पुलिस द्वारा कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद विधायक का बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित न होना कई संदेह उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि आखिरकार नौवें नोटिस पर जाकर बयान देना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं जांच से बचने या उसे प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
जांच रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर भी सवाल
भाजपा नेता ने उस कथित जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए, जिसके आधार पर विधायक ने एमएमएस को फर्जी बताया है। उन्होंने पूछा कि यह जांच कहां और किस एजेंसी द्वारा कराई गई? क्या उस एजेंसी की कोई आधिकारिक मान्यता है? और क्या रिपोर्ट की प्रमाणिकता सार्वजनिक की गई है? इन सवालों के जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं।
सुनियोजित साजिश का आरोप
राजेंद्र अरोरा ने पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित रणनीति करार देते हुए कहा कि पहले एक कहानी गढ़ी गई, फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया गया और बाद में राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राजनीति लोकतंत्र के लिए घातक है और इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है।
महिला की पहचान और बयान जरूरी
अरोरा ने यह भी मांग की कि एमएमएस में दिखाई देने वाली महिला की पहचान कर उसका बयान लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि वीडियो वास्तविक है, तो संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि यह फर्जी है, तो इसके पीछे की साजिश का खुलासा होना चाहिए।
चुनावी साजिश की आशंका
उन्होंने आशंका जताई कि यदि यह पूरा प्रकरण चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से रचा गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों से अपील की कि वे बिना किसी दबाव के निष्पक्षता के साथ जांच करें और जल्द से जल्द सच्चाई जनता के सामने लाएं।
निष्पक्ष जांच पर जताया भरोसा
अंत में राजेंद्र अरोरा ने विश्वास जताया कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से कार्य करेंगी और सच्चाई को उजागर करेंगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शिता और तेजी से कार्रवाई बेहद जरूरी है ताकि जनता का विश्वास बना रहे और दोषियों को सजा मिल सके।





