
रायपुर। ओबीसी महासभा छत्तीसगढ़ द्वारा शनिवार को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ कार्यालय में महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता शगुन लाल वर्मा ने महात्मा फुले के जीवन, विचारों और उनके द्वारा किए गए सामाजिक सुधारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फुले ने समाज में व्याप्त असमानता, छुआछूत और अशिक्षा के खिलाफ संघर्ष करते हुए पिछड़े वर्गों, महिलाओं और वंचितों के उत्थान के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। उनके योगदान को याद करना और उनके आदर्शों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महात्मा फुले ने न केवल सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया, बल्कि शिक्षा के महत्व को भी समाज के सामने रखा। अंग्रेजी शासनकाल के दौरान जब महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था, उस समय उनकी पत्नी माता सावित्रीबाई फुले ने स्कूल खोलकर महिलाओं को शिक्षित करने की पहल की। यह कदम उस दौर में एक क्रांतिकारी परिवर्तन साबित हुआ, जिसके परिणामस्वरूप समाज के पिछड़े वर्गों में शिक्षा का प्रसार संभव हो सका।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के प्रसार से ओबीसी समाज में जागरूकता बढ़ी है और आज समाज अपने अधिकारों को समझने और उन्हें प्राप्त करने के लिए संगठित हो रहा है। महापुरुषों की जयंती मनाकर उनके विचारों को समाज तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी उनके संघर्ष और योगदान से प्रेरणा ले सके।
इस दौरान ओबीसी महासभा द्वारा चलाए जा रहे पोस्टकार्ड लेखन अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित पत्र लिखकर ओबीसी समाज की जाति जनगणना कराने की मांग दोहराई गई। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी नए नियमों को सभी विश्वविद्यालयों में लागू करने की मांग भी उठाई गई।
कार्यक्रम में (संभाग अध्यक्ष, रायपुर), (जिला अध्यक्ष, रायपुर), , छात्र विंग सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आयोजन के अंत में सभी ने महात्मा फुले के विचारों को समाज में आगे बढ़ाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया।





