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साड़ी वितरण पर सियासत गरम: बीजेपी–कांग्रेस आमने-सामने, गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर घमासान

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रायपुर |

छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई साड़ियों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। साड़ियों की गुणवत्ता पर उठे सवालों ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

गुणवत्ता पर उठे सवाल, कई जिलों से शिकायतें

राज्य के विभिन्न जिलों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा शिकायतें सामने आई हैं कि उन्हें जो साड़ियाँ वितरित की गई हैं, वे बेहद खराब गुणवत्ता की हैं। कई जगहों पर साड़ियों का कपड़ा पतला, कमजोर और उपयोग के लायक नहीं बताया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह साड़ियाँ न केवल जल्दी खराब हो रही हैं, बल्कि पहनने में भी असुविधाजनक हैं।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ साड़ियों की लंबाई भी निर्धारित मानकों से कम बताई जा रही है, जिससे विवाद और गहरा गया है। आमतौर पर एक साड़ी की लंबाई 5.5 से 6 मीटर होती है, जबकि वितरित साड़ियों की लंबाई लगभग 4.5 मीटर बताई जा रही है।

मंत्री की सफाई, विपक्ष पर पलटवार

मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सामने आकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सभी साड़ियाँ खराब नहीं हैं, हालांकि कुछ जगहों से गुणवत्ता को लेकर शिकायतें जरूर मिली हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है।

मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में भी साड़ी वितरण में भारी भ्रष्टाचार होता था। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—

“कांग्रेस के समय जो साड़ियाँ आती थीं, वो पहनने लायक नहीं होती थीं, मछली पकड़ने के काम आती थीं।”

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस का पलटवार, लगाए गंभीर आरोप

वहीं कांग्रेस ने मंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महिला एवं बाल विकास विभाग में भी कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जो साड़ियाँ वितरित की गई हैं, वे न केवल घटिया हैं बल्कि उनकी लंबाई भी कम है, जिससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उन्हें पहन नहीं पा रही हैं।

उन्होंने कहा—

“ऐसा कोई विभाग नहीं बचा है, जहां कमीशनखोरी न हो। सरकार द्वारा की जा रही हर खरीदी में भ्रष्टाचार साफ नजर आ रहा है।”

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

इस पूरे मामले को लेकर अब जांच की मांग भी तेज हो गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संगठनों ने सरकार से पारदर्शिता के साथ जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर महिला कर्मचारियों और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

साड़ी वितरण का यह मामला अब केवल गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भ्रष्टाचार के आरोपों में बदल चुका है। जहां एक ओर सरकार सफाई दे रही है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा घोटाला बताकर लगातार हमलावर है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और इस पर क्या ठोस कार्रवाई होती है।

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