
*विधानसभा में गूंजा मामला, फिर भी मगरलोड तहसील में फाइलों पर कुंडली मार कर बैठे अफसर..*
चुनेश साहू । धमतरी
धमतरी विधायक द्वारा पूर्व विधानसभा सत्र में कोटवारी भूमि के अवैध क्रय-विक्रय को लेकर लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और वर्तमान जारी बजट सत्र के दरम्यान जिले के राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूरे मामले में प्रशासन का रवैया पक्षपातपूर्ण और संदिग्ध नजर आ रहा है, जहाँ तहसील भखारा में कार्यवाही का आंशिक दिखावा किया जा रहा है, वहीं मगरलोड तहसील में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वहां फाइलों को दबाने का खेल जारी है। भखारा तहसील के ग्राम जुगदेही में विधायक के तीखे तेवरों के बाद तहसीलदार ने आनन-फानन में 19 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर भुइयां पोर्टल पर संबंधित खसरा नंबरों में ‘अहस्तांतरणीय’ शब्द तो दर्ज करा दिया है ताकि भविष्य में भूमि की खरीदी-बिक्री न हो सके, लेकिन मूल दोषियों पर कार्यवाही अब भी सिफर है। नायब तहसीलदार भखारा ने पूर्व में हुए दो अवैध नामांतरणों को निरस्त करने हेतु मामला अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुरुद को प्रेषित किया है, किंतु आरोपी कोटवार और पटवारी के विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई नही करना इस बात की ओर इशारा करता है कि विभाग अपने भ्रष्ट तंत्र को बचाने की फिराक में है।
दूसरी ओर मगरलोड तहसील की स्थिति और भी भयावह है जहाँ भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण प्राप्त होता दिख रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बिरझुली में साल 2020 में पदस्थ तत्कालीन पटवारी और वर्तमान कोटवार ने मिलीभगत कर शासकीय सेवा भूमि को निजी स्वार्थ के लिए ‘भूमिस्वामी’ मद में परिवर्तित कर दिया। स्थानांतरण से ठीक पहले इस पटवारी ने कूट रचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय अभिलेखों में हेराफेरी की और भविष्य में कार्यवाही से बचने के लिए शातिर तरीके से ‘अहस्तांतरणीय’ शब्द लिख दिया ताकि सरकारी जमीन का बंदरबांट आसानी से किया जा सके। इस जालसाजी के माध्यम से कोटवारी भूमि का एक हिस्सा कुरुद में पंजीयन भी करा दिया गया, लेकिन इस गंभीर अपराध के बावजूद मगरलोड के नायब तहसीलदार और तहसीलदार ने आरोपियों के विरुद्ध बर्खास्तगी या एफआईआर जैसी कोई कार्रवाई नहीं की है।
आरोप है कि राजस्व अधिकारियों और आरोपियों के बीच की गहरी सांठगांठ के चलते ही दोषियों को बचाने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। विधानसभा जैसे उच्च सदन में मामला गूंजने के बावजूद जिला प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों के हौसलो को बुलंद कर रही है और यह साबित कर रही है कि ये धमतरी राजस्व है जहां हर असंभव काम को संभव किया जाता है। जब रक्षक ही भक्षक बनकर सरकारी जमीनों का सौदा करने लगें और वरिष्ठ अधिकारी उन पर पर्दा डालें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि जिले में भ्रष्टाचार का सिंडिकेट व्यवस्था पर हावी हो चुका है। यदि तत्काल प्रभाव से इन कूटरचना करने वाले पटवारियों और कोटवारों को पद से बर्खास्त कर जेल नहीं भेजा गया, तो विधायक के ध्यानाकर्षण की प्रासंगिकता केवल कागजी खानापूर्ति तक ही सिमट कर रह जाएगी। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि बिरझुली के कोटवार, कोटवारी कार्यों को छोड़कर जमीन दलाली में ही मस्त रहते हैं, और यही कारण है कि मगरलोड तहसीलदार कोटवार के व्यक्तिगत लाभ से प्रभावित होकर कोटवार को खुला संरक्षण दे रहे है और यही अजीबोगरीब कारनामा कर धमतरी जिले का राजस्व विभाग दिन ब दिन कथित घोटालों का नया कीर्तिमान रच रहा है, साथ ही आलम यह भी है कि जिला मुखिया के संज्ञान में आने के बावजूद भी निष्क्रिय रवैया से आम जनमानस का भरोसा राजस्व विभाग से डगमगा रहा है और भू माफिया , राजस्व प्रशासनिक अमला इसका भरपूर लाभ ले रहे है, यदि जिला प्रशासन का रवैया ऐसे ही रहा तो सड़कों से लगी बेशकीमती शासकीय जमीनों को भूमिस्वामी बना कर निजी संपत्ति में तब्दील कर शासकीय भूमियों का दोहन किया जाता रहेगा…?.?.?.?
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