
चुनेश साहू । धमतरी
मगरलोड तहसील के तहसीलदार श्री भार_द्वाज, जिन्हें स्थानीय लोग अब ‘गोहिया 2.0’ के नाम से पुकारते हैं, एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार ग्राम डुमरपाली की निवासी जागृति ठोकने ने उनके खिलाफ जिला कलेक्टर के जनदर्शन में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें रिश्वत लेकर गलत आदेश पारित करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला आबादी भूमि के विवाद से जुड़ा है, जहां तहसीलदार ने कथित रूप से अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर एक महिला को उसके घर से बेघर कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सरकारी पद की गरिमा पर कलंक है और भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका प्रमाण है।
जागृति ठोकने ने अपनी शिकायत में बताया कि विवाद ग्राम डुमरपाली की आबादी भूमि खसरा नंबर 586 के भाग, यानी खसरा नंबर 586/57 (रकबा 692 वर्ग मीटर) से जुड़ा है। उन्होंने धनेश्वर निषाद से अंतरजातीय विवाह किया, जिसके चलते उनके भाई संतोष ठोकने से रिश्ते खराब हो गए। जागृति का आरोप है कि संतोष ने वर्ष 2017 में तत्कालीन पटवारी और सरपंच से साठगांठ कर मुख्यमंत्री आबादी पट्टा योजना के तहत पट्टा अपने नाम पर करा लिया। उन्होंने इसकी आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन छल-कपट से पट्टा संतोष के नाम हो गया। जागृति इस भूमि पर पशु रखने और मकान सामग्री रखने के लिए उपयोग कर रही थीं।
मामला यहीं नहीं रुका। विवाद माननीय व्यवहार न्यायालय कुरूद में वाद क्रमांक 74-अ/2018 के रूप में विचाराधीन है। साथ ही, नई आबादी पट्टा स्वामित्व योजना के सर्वे में जागृति का नाम शामिल होने की जानकारी है। उन्होंने बताया इन सब तथ्यों को तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया, लेकिन उन्होंने कथित रूप से संतोष ठोकने से निजी लाभ से प्रभावित होकर 2 अप्रैल 2025 को गलत आदेश पारित कर दिया। आदेश में प्रचलित आबादी भूमि से जागृति का कब्जा हटाने का निर्देश दिया गया।
राजस्व विशेषज्ञों के अनुसार, आबादी भूमि के विवादों का निराकरण ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि तहसीलदार के। इसके अलावा, यह स्वत्व का मामला है, जिसका फैसला केवल माननीय व्यवहार न्यायालय कर सकते है। धारा 250 के तहत भी, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे की लगानी भूमि पर मकान बनाकर रह रहा हो, तो तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने का अधिकार नहीं है।
फिर भी, तहसीलदार ने आदेश का पालन करवाया। 4 दिसंबर 2025 को शाम 5 बजे के बाद राजस्व अधिकारी, कर्मचारी और थाना मगरलोड की पुलिस की मौजूदगी में जागृति के मकान से बर्तन, कपड़े और अन्य सामान बाहर फेंक दिया गया। मकान पर ताला लगा दिया गया। जागृति का कहना है कि यह उनके साथ अन्याय है, और तहसीलदार ने संतोष से व्यक्तिगत जेब गरम को लेकर यह कदम उठाया। स्थानीय लोगों में इस घटना से आक्रोश है, क्योंकि ‘गोहिया 2.0’ पहले भी कई विवादास्पद फैसलों के लिए विख्यात रहे हैं।
तहसीलदार के इस आदेश के खिलाफ वर्तमान में मामला कुरूद न्यायालय में लंबित है। जागृति ने कलेक्टर से अपील की है कि उन्हें घर पर पुनः कब्जा दिलाया जाए और तहसीलदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। लेकिन सवाल यह है कि क्या जिला मुखिया कलेक्टर इस पर ध्यान देंगे? पिछले कई मामलों में राजस्व विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई। क्या यह भी वैसा ही होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई न होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है, और आम नागरिकों का विश्वास टूटता है।
इस मामले में संबंधित तहसीलदार का पक्ष जानने को संपर्क साधा गया लेकिन समाचार के प्रकाशन तक उनके तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है
यह घटना धमतरी जिले में राजस्व प्रशासन की साख पर सवाल खड़े करती है। अंतरजातीय विवाह जैसी सामाजिक मुद्दों पर आधारित विवादों में सरकारी अधिकारी यदि पक्षपात करेंगे, तो न्याय की उम्मीद कहां से की जाए? स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साबित होगा कि सिस्टम में भ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है। जागृति जैसे पीड़ितों की आवाज दबाने से समाज में असंतोष बढ़ेगा, और प्रशासन की विश्वसनीयता पर स्थायी दाग लगेगा। बहरहाल देखना होगा कि ‘गोहिया 2.0’ का यह कारनामा उन्हें कितना महंगा पड़ता है, या फिर वे बच निकलेंगे
चुनेश साहू 9111988965
अस्वीकरण (Disclaimer):
उपरोक्त समाचार में वर्णित घटना एवं आरोप ग्राम डुमरपाली निवासी श्रीमती जागृति ठाकुर द्वारा जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत शिकायत तथा उनके एकपक्षीय बयानों पर आधारित हैं। पक्षपात के आरोप अभी केवल शिकायत के स्तर पर हैं तथा इनकी कोई स्वतंत्र जांच या न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
पारित आदेश के खिलाफ इसका विरोध संबंधित पक्ष द्वारा सिविल न्यायालय में विचाराधीन है, जहां स्वत्व एवं कब्जे का अंतिम निर्णय होगा।
समाचार में प्रयुक्त ‘गोहिया 2.0’ जैसे विशेषण जनसामान्य में प्रचलित उपनाम पर आधारित हैं, किंतु इनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। प्रकाशित सामग्री का उद्देश्य केवल जनहित में सूचना प्रदान करना है तथा यह किसी व्यक्ति विशेष की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाने का आशय नहीं रखता।
समाचार में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं एवं राजस्व जानकारों, सलाहकारों, विशेषज्ञों के अधीन यह लेख लिखा गया है ,तथा इनसे प्रकाशन संस्थान की सहमति अनिवार्य नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस मामले में सभी पक्षों की स्थिति एवं न्यायिक निर्णय का इंतजार करें ।





