
दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा समाप्त करने की दिशा में सरकार और सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। दंतेवाड़ा जिले में शुक्रवार को 37 नक्सलियों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें कई कुख्यात कैडर शामिल हैं जो लंबे समय से सुरक्षा बलों को निशाना बनाते थे।
सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में कई सक्रिय मिलिशिया सदस्य, जनमिलिशिया कमांडर, वर्दीधारी और प्लाटून सदस्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे अब हिंसा से दूर रहकर समाज और विकास से जुड़ना चाहते हैं।
23 महीनों में 2200 से अधिक माओवादी कर चुके हैं सरेंडर
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले 23 महीनों में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा क्षेत्रों में अब तक 2200 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
सरकार की लोन वर्राटू (घर लौटो) योजना, रोजगार प्रोत्साहन, पुनर्वास पैकेज और शिक्षा सुविधाओं ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरकार का बयान
राज्य सरकार ने कहा कि “यह सफलता सुरक्षा बलों की कड़ी रणनीति, जनजागरण अभियानों और पुनर्वास योजनाओं का परिणाम है। लक्ष्य है कि सभी माओवादियों को सामाजिक जीवन में वापस लौटने का अवसर मिले।”
सुरक्षा बलों का योगदान सराहनीय
CRPF, DRG और पुलिस बलों ने क्षेत्र में लगातार अभियान चलाकर नक्सलियों के नेटवर्क को कमजोर किया है। कई इलाकों में सड़क, पुल, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं के विकास ने भी गांवों में विश्वास बढ़ाया है।
स्थानीय लोगों ने जताई खुशी
ग्रामीणों ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर राहत व्यक्त करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में शांति और विकास की राह और मजबूत होगी।
मुख्य बिंदु: 37 नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में किया आत्मसमर्पण 23 महीनों में 2200+ नक्सली मुख्यधारा में लौटे लोन वर्राटू योजना और विकास कार्य प्रमुख कारण सुरक्षा बलों की रणनीति और अभियान सफल
निष्कर्ष
दंतेवाड़ा में नक्सलियों का आत्मसमर्पण राज्य की शांति बहाली की दिशा में एक और बड़ी जीत है। सरकार का दावा है कि आने वाले महीनों में और भी माओवादी संघर्ष छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।





