
कवर्धा,पंडरिया थाना क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार वर्षों से चलता आ रहा है और अब यह समस्या इतनी गहरी हो चुकी है कि स्थानीय नागरिकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार जहां इस गैरकानूनी गतिविधि के दुष्प्रभावों से जूझ रहे हैं, वहीं कानून-व्यवस्था संभालने वाले विभाग की अदृश्य चुप्पी और निष्क्रियता पर तीखे सवाल उठ रहे हैं।
वर्षों से जमे कर्मचारियों पर शक की सुई
सूत्रों के अनुसार, पंडरिया थाने में कुछ कर्मचारी तीन वर्ष की निर्धारित सेवा सीमा पार करने के बावजूद लगातार पदस्थ हैं। शासन के सेवा नियमों के अनुरूप यह स्थिति सही नहीं मानी जाती। इससे यह संदेह और प्रबल हो रहा है कि कहीं किसी उच्च स्तर से संरक्षण या रिश्तों का प्रभाव तो नहीं, जिसके चलते इन कर्मचारियों को वर्षों से यहां बने रहने दिया गया है।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय पर उचित स्थानांतरण और निगरानी होती, तो अवैध शराब नेटवर्क इतनी मजबूती से पैर न जमा पाता।
गांव से शहर तक फैली अवैध शराब की जड़ें
पंडरिया के कई हिस्सों में अवैध बिक्री निर्बाध रूप से जारी है। यह नेटवर्क अब संगठित संरचना का रूप ले चुका है, जिसकी प्रतिदिन की बिक्री 300 से 400 नग तक बताई जाती है।
अवैध बिक्री के प्रमुख स्थानों में शामिल हैं
ग्राम पौनी
किशुनगढ़ SC छात्रावास के पास
रेस्ट हाउस के आसपास
नया बस स्टैंड, पंडरिया
गांधी चौक, जिसे शहर का मुख्य केंद्र माना जाता है, इन स्थानों पर लंबे समय से बिना किसी प्रभावी रोक-थाम के शराब बिकना विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
जनता के सवाल प्रशासन की ओर
जनता अब सीधे तौर पर जिम्मेदार विभाग और सरकार से जवाब मांग रहे हैं,अवैध शराब कारोबार को वर्षों से पनपने दिया किसने? क्या न्याय और अन्याय की रेखा को जानबूझकर धुंधला किया जा रहा है?
क्या शासन के सेवा नियमों और संवैधानिक उपबंधों का पालन होगा?
इन सवालों ने पूरे मामले को गंभीर जनचर्चा का विषय बना दिया है। जिसमें पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई की माँग तेज हो चुकी है।
जनता की मांग है इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों की भूमिका की जाँच की जाए सवाल यह है कि ये मिलीभगत या लापरवाही सामने आती है, तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अवैध शराब कारोबार पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।
कानून की गरिमा और जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक माने जा रहे हैं।





