
गुवाहाटी।
भारतीय क्रिकेट इतिहास में शनिवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। टीम इंडिया के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ऋषभ पंत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में खेले जा रहे दूसरे और अंतिम टेस्ट मैच में भारतीय टीम की कमान संभालकर एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इसके साथ ही पंत टेस्ट क्रिकेट में भारत का नेतृत्व करने वाले सिर्फ दूसरे विकेटकीपर कप्तान बन गए हैं।
यह ज़िम्मेदारी उन्हें तब मिली जब टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल गर्दन की चोट के कारण इस निर्णायक मुकाबले से बाहर हो गए। गिल के चोटिल होने के बाद टीम प्रबंधन ने युवा और आक्रामक सोच के लिए पहचाने जाने वाले ऋषभ पंत को कप्तानी की बागडोर सौंपी।
टीम की रणनीति में संभावित बदलाव
पंत के नेतृत्व में भारतीय टीम की रणनीति में तेज और आक्रामक बदलाव देखने की उम्मीद है। उनकी कप्तानी शैली सीमित ओवरों में तो अक्सर दिखती रही है, लेकिन टेस्ट मैच में यह पहला बड़ा मौका है जब वे टीम के फैसले लेंगे। माना जा रहा है कि पंत गेंदबाजों का रचनात्मक उपयोग कर सकते हैं और बल्लेबाजी क्रम में भी नई सोच का समावेश कर सकते हैं।
खिलाड़ियों का मिला भरपूर समर्थन
टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों ने पंत को कप्तानी की जिम्मेदारी मिलने पर पूरा समर्थन जताया है। कई खिलाड़ियों ने कहा कि पंत मैदान पर ऊर्जा भर देते हैं और उनकी नेतृत्व क्षमता टीम को सकारात्मक दिशा देगी। वहीं पंत ने भी मैच से पहले कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है और वे टीम की जीत को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।
विशेषज्ञों की नजरें पंत पर
भारतीय क्रिकेट के कई पूर्व दिग्गज और विशेषज्ञ इस मुकाबले को पंत की कप्तानी का ‘टेस्ट’ मान रहे हैं। उनका मानना है कि यदि पंत इस अवसर को अच्छी तरह भुनाते हैं, तो भविष्य में उन्हें भारतीय टीम के नेतृत्व समूह में स्थायी स्थान मिल सकता है।
श्रृंखला का निर्णायक मुकाबला
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यह मैच श्रृंखला के नतीजे को तय करेगा, इसलिए इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है। शुभमन गिल की अनुपस्थिति में पंत की हर चाल, हर फैसले पर क्रिकेट जगत की नज़रें टिकी हुई हैं। प्रशंसक भी यह देखने को उत्सुक हैं कि क्या पंत अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को जीत दिला पाएंगे।





