अजय जांगड़े
कबीरधाम, जिला कलेक्टर कार्यालय के जन दर्शन कार्यक्रम में एक बार फिर उस तस्वीर ने चर्चा बटोरी है जिसमें देश के करदाता सह आम नागरिक घंटों जमीन पर बैठकर अपनी परेशानी प्रशासन तक पहुँचाने का इंतजार कर रहे हैं यह आवश्यक और सराहनीय भी है लेकिन। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक-अधिकारों दोनों पर कई सवाल खड़े करती है। जब सरकार और अधिकारी नागरिकों की समस्याएँ सुनने के लिए बैठकें आयोजित करते हैं, तब क्या नागरिकों को सम्मानजनक ढंग से इंतजार करने की प्रमुख सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए?
वर्तमान व्यवस्था में न केवल सुविधाएँ नदारद हैं, बल्कि इसी कारण शिक्षित और अशिक्षित नागरिकों में भी सरकारी दफ्तर का भय और असहजता बढ़ रही है। इसमें खासकर वरिष्ठ नागरिक, महिलाएँ व दिव्यांगजन, जिनको बैठने के लिए अलग सुविधा चाहिए, वे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। अधिकारीगण समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश तो देते हैं, लेकिन अपनी बारी के इंतजार में करदाता या आम नागरिक को ज़मीन पर बैठना पड़ता है।
जन दर्शन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को एक मंच देना है, जिसमें वे अपनी समस्याएँ अधिकारियों के सामने रख सकें। किंतु बैठक-सुविधाओं का अभाव इन लोगों को असहज और अपमानित महसूस कराता है। आम करदाता, जो देश के विकास में आर्थिक सहयोग देते हैं, उनके लिए सरकारी कार्यालयों में सम्मानजनक वातावरण और मूलभूत सुविधाएँ होना अत्यंत आवश्यक है।देश के करदाताओं की व्यवस्था सरकार की दायित्व है कि वह उनकी इंतजार की तय सीमा पर उनकी बैठक व्यवस्था उचित रूप से क्रियान्वित करे जिससे उनको होने वाले समस्याओं से राहत मिल सके।
जिला व सरकारी कार्यालयों में बैठने के समुचित इंतजाम सुनिश्चित किए जाएँ। इससे उनके सम्मान की रक्षा होगी और प्रशासन के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा। अधिकारों की सुरक्षा, संवाद की सहजता और मन की चिंता दूर करने के लिए प्रशासन को शीघ्र ही स्थायी समाधान खोजने चाहिए।







