पंडरिया:प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार और धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर पालिका परिषद पंडरिया में पदस्थ आवास वास्तुकार सह आवास मित्र ( इंजीनियर) आकाश ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने अपात्र लोगों को पात्र बनाकर योजना का लाभ दिलाया। पूरे मामले में घूसखोरी और मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
RTI से हुआ खुलासा
सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह साफ हुआ है कि जिन व्यक्तियों के नाम पर पहले से पक्का मकान दर्ज है और जिन पर संपत्ति कर लगाया जा चुका है, वे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद नगर पालिका परिषद ने ऐसे लोगों को आवास योजना का लाभ प्रदान किया। यह तथ्य स्पष्ट करता है कि नियमों को दरकिनार कर मनमानी की गई और सरकार के साथ छलावा किया गया।
इंजीनियर पर अनियमितता के आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आवास इंजीनियर आकाश ठाकुर ने योजना के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएँ की हैं। आरोप यह भी है कि पात्र हितग्राही को दरकिनार कर अपात्रों को योजना का लाभ दिलाने के लिए मोटी रकम ली गई। यह कार्य सिर्फ पंडरिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पांडातराई क्षेत्र में भी इसी प्रकार की गड़बड़ियाँ की गई हैं।
शपथ पत्र बना भ्रष्टाचार का कवच
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाभार्थियों से शपथ पत्र भरवाए जाते हैं। आरोप है कि इन्हीं शपथ पत्रों को कवच बनाकर अपात्र लोगों को पात्र दिखाया गया। वर्षों से इस योजना में कार्यरत कर्मचारी और इंजीनियर इस खेल को अंजाम देते रहे हैं।
नागरिकों में आक्रोश
स्थानीय लोगों में इस अनियमितता को लेकर रोष व्याप्त है। नागरिकों का कहना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच की जाए तो करोड़ों रुपये की रिकवरी संभव है और सरकार को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है।
कलेक्टर को सौंपा जाएगा ज्ञापन
नागरिक संगठनों ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि आकाश ठाकुर के कार्यकाल में बने सभी प्रधानमंत्री आवासों की जांच की जानी चाहिए। जल्द ही इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
विपक्षी दलों ने भी इस प्रकरण पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब पक्के मकान और संपत्ति कर की स्थिति स्पष्ट है, तो फिर अपात्र लोगों को कैसे योजना का लाभ दिया गया? विपक्ष ने मांग की है कि इस मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए।
ईमानदार अधिकारियों से कार्रवाई की अपेक्षा
समाज के बुद्धिजीवी वर्ग का मानना है कि ऐसे मामलों पर आंख मूंदकर बैठना समाज और शासन दोनों के लिए घातक है। यदि ईमानदार अधिकारी इस प्रकरण को गंभीरता से लें और निष्पक्ष जांच कराएं, तो भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सकती है और आवास योजना का वास्तविक लाभ गरीब एवं जरूरतमंदों तक पहुँच सकेगा।