
- चुनेश साहू । धमतरी
तहसील भखारा में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों ने स्थानीय कृषकों में आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्राम जुगदेही, पचपेड़ी और कोसमर्रा के भूमि संबंधी मामलों में नायब तहसीलदार भखारा पर पटवारी, कोटवार तथा प्रभावित पक्षकारों से कथित रिश्वत लेकर जांच दबाने और लीपा-पोती करने के आरोप लगे हैं।
ज्ञातव्य हो कि धमतरी विधायक द्वारा विधानसभा के शीतकालीन सत्र एवं बजट सत्र में इन मामलों को ध्यानाकर्षण प्रश्न के माध्यम से उठाए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने इन प्रकरणों की शिकायत लोकायुक्त रायपुर में करने की तैयारी कर ली है, जिसमें नायब तहसीलदार की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने हैं।
ग्राम जुगदेही में कोटवारी सेवा भूमि की दो बार अवैध खरीदी-बिक्री का मामला सामने आया है, जिसमें कोटवार और पटवारी की संलिप्तता बताई जा रही है। वहीं ग्राम पचपेड़ी में आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासी के नाम पर सीधे दर्ज करने का आरोप है। इन दोनों मामलों की प्रारंभिक जांच नायब तहसीलदार भखारा को सौंपी गई थी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने संबंधित पटवारी, कोटवार और प्रभावित पक्षकारों से कथित रिश्वत लेकर पूरे मामले में लीपा-पोती कर इतिश्री कर दिया गया है।
इसी तरह ग्राम कोसमर्रा में अवैध रूप से कोटवारी भूमि की खरीद-बिक्री की शिकायत जिला जनदर्शन में दो-तीन अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा दर्ज कराई गई थी। इसकी जांच भी जांच नायब तहसीलदार भखारा द्वारा किया गया। जहां इन मामलों में त्वरित जाँच कर शासकीय भूमि की खरीद फ़रोखत व आदिवासी भूमि के स्वरूप को बिना कलेक्टर अनुमति के सीधे ग़ैर आदिवासी के नाम पर दर्ज करने में शामिल व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज किया जाना चाहिए वहां पर आरोपियों से ही सांठ गांठ कर लाखों रुपए की कथित रूप से रिश्वत लेकर नायब तहसीलदार भखारा द्वारा मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
स्थानीय कृषकों और सूत्रों का कहना है कि फौती नामांतरण के मामलों में पटवारी सीधे किसानों को नायब तहसीलदार के पास भेजते हैं, जहां चढ़ावें की मांग की जाती है। मांग पूरी होने पर कार्य तुरंत निपट जाता है, जबकि इच्छानुसार चढ़ावे नहीं होने पर दस्तावेज सही होने के बावजूद नामांतरण खारिज कर दिया जाता है। बंटवारे के प्रकरणों में भी कुछ इसी प्रकार का हाल है, चढ़ावे देने पर बंटवारा आदेश में सह-खातेदारों का नाम तक विलोपित कर दिया जाता है। अन्यथा सभी आवश्यक दस्तावेज़ होने पर भी बंटवारा ख़ारिज कर दिया जाता है। राजस्व अभिलेख में नाम की त्रुटि सुधारने के लिए भी मुंहमंगा मोटी रकम चढ़ावा के रूप में लिया जाता है। न्यायालय में बिना वजह तारीख पर तारीख देकर पक्षकारों को परेशान किया जाता है और चढ़ावा मिलते ही तुरंत आदेश जारी कर दिया जाता है।
तहसील भखारा के किसानों के बीच यह भी चर्चा है कि नायब तहसीलदार इन्हीं सब चढ़ावे से नई चार पहिया वाहन खरीदी है जो कभी दो पहिया वाहनों के मोहताज थे।
पूर्व में भी इन अधिकारी पर ग्राम सिलौटी के शासकीय भूमि के अवैध खरीदी बिक्री के संबंध में तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश को एक साल तक आरोपियों से कथित रूप से रिश्वत लेकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, मामला के प्रकाशन पश्चात एक साल बाद दबाव होने पर आनन फानन में एफआईआर दर्ज कराने लिए संबंधित थाना को पत्राचार किया गया है।
लेकिन प्राप्त जानकारी मुताबिक अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है।
धमतरी जिले में राजस्व विभाग में प्रतिदिन कोई न कोई कथित घोटाला और अनियमितता सामने आ रहा है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा किसी भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं किए जाने से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठ रहे हैं। विधायक के ध्यानाकर्षण के बावजूद नायब तहसीलदार भखारा द्वारा आरोपियों से कथित सांठ-गांठ कर मामलों को दबाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
जिला प्रशासन के इस लचर व्यवस्था से किसानों एवं पक्षकारों में भारी रोष व्याप्त है , धमतरी राजस्व विभाग विष्णुदेव साय सरकार के नीतियों को ठेंगा दिखा रहा है, बावजूद इसके जिला प्रशासन द्वारा मौन सहमति या मूकदर्शक बन बैठे रहना आम जनमानस में अनेक संदेहों, सवालों को जन्म दे रहा है बहरहाल देखना होगा आगे क्या कार्यवाही की जाती है।
चुनेश साहू 7049466638





