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वन भूमि पर ठेकेदार का कब्ज़ा, विभाग की मेहरबानी से दबे साल-सागौन के पौधे!

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कार्यवाही के बजाय ठेकेदार को “2 दिन का वक्त” — वन रक्षक का कबूलनामा बना सवालों का सबूत….!

 

कटघोरा:-वन मंडल कटघोरा के अंतर्गत जटगा वन परिक्षेत्र के सुतर्रा सर्किल P-308 में पाइपों का ढेर अब विभागीय मिलीभगत का खुला प्रमाण बन चुका है। खबर प्रकाशन के बाद उम्मीद थी कि विभाग तुरंत मौके पर पहुँचकर पाइप ज़ब्त करेगा और प्रकरण दर्ज करेगा। लेकिन हुआ इसके उलट — वन रक्षक रोबिन भरद्वाज ने खुद पत्रकार को फोन कर कहा कि “संबंधित ठेकेदार को बोल दिया हूँ, वह 1-2 दिन में पाइप हटा लेगा।”

 

कानून तोड़ने वालों को संरक्षण?

 

भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि पर बिना अनुमति किसी भी प्रकार की सामग्री रखना अपराध है। ऐसे मामलों में तत्काल जब्ती और FIR दर्ज होनी चाहिए। लेकिन यहाँ वन रक्षक ने कार्रवाई करने की बजाय ठेकेदार को “समय” देकर यह साफ कर दिया कि विभाग कानून तोड़ने वालों का संरक्षक बन गया है।

 

पौधों का दम घुटा, विभाग मौन…!

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपों के नीचे साल और सागौन के पौधे दबकर खराब हो गए हैं। जिन पौधों की देखभाल कर वन विभाग लाखों रुपये खर्च कर रहा है, उन्हीं को विभागीय मिलीभगत से कुचलने दिया गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह पूरा खेल ठेकेदार और विभाग की सेटिंग का नतीजा है।

ठेकेदार का मोबाइल नंबर भी वन रक्षक के पास!

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस ठेकेदार पर विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए, उसका मोबाइल नंबर खुद वन रक्षक के पास क्यों है? और क्यों विभाग उसकी मदद कर रहा है कि पाइप हटवाने का समय मिले? यह सीधा संकेत है कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के नहीं हो सकती।

 

जनता में आक्रोश — क्या आम जनता के लिए ही कानून?

ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा — “अगर कोई गरीब आदमी जंगल से लकड़ी या बांस ले जाए तो तुरंत अपराध बना दिया जाता है। लेकिन ठेकेदार खुलेआम वन भूमि पर कब्ज़ा करे तो विभाग उसे बचाने में जुटा है। क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए ही है?”

अब देखना होगा कि इस पूरे प्रकरण पर वन मंडल कटघोरा और उससे ऊपर के अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर हमेशा की तरह फाइल दबाकर ठेकेदार को बचा लिया जाएगा?

फिलहाल, वन विभाग की यह “मेहरबानी” उसकी कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर रही है।

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