
वाराणसी: चौबेपुर थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव में रविवार को हुई दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर दिया। आपसी कलह और गुस्से के अंधेपन में एक पिता ने अपने ही दो मासूम बेटों के साथ जिंदगी खत्म करने का खौफनाक कदम उठा लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रिंग रोड स्थित भवनपुरा पुल पर संदीप (8) और आशीष (6) अपने पिता दुर्गा के साथ पुल के बीचोबीच खड़े होकर गंगा की लहरें देख रहे थे। अचानक दुर्गा ने पहले आशीष को नदी में फेंक दिया। यह देखकर संदीप घबरा गया और “पापा, पापा” चीखते हुए मदद की गुहार लगाई, लेकिन दुर्गा ने उसे भी धक्का दे दिया। दोनों बच्चों के गिरते ही उनकी मासूम चीखें लहरों में गुम हो गईं। कुछ ही पलों बाद पिता भी पुल से छलांग लगा बैठा। नदी के तेज बहाव में दोनों बच्चे तुरंत गहराई में समा गए, जबकि दुर्गा का शव भी बहाव के साथ मुस्तफाबाद की ओर निकल गया। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिजनों ने बताया कि दुर्गा का अपनी पत्नी और घर के अन्य सदस्यों से विवाद चल रहा था। घटना से पहले उसने कहा था— “आज सारा किस्सा खत्म कर दूंगा।” छोटे भाई ने उसे रोकने की कोशिश की और पीछे-पीछे पुल तक भी गया, लेकिन वह यह त्रासदी रोक नहीं सका।
नसीहत:
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। गुस्सा, आक्रोश या निराशा में लिया गया एक गलत फैसला जिंदगी को बर्बाद कर देता है और मासूम जिंदगियों को भी निगल जाता है। कलह के वक्त एक पल रुककर सोचें— समस्या का समाधान हमेशा बातचीत और धैर्य से होता है, कभी भी आत्मघाती कदम से नहीं।





