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*ग्राम प्रमुखों की उपस्थिति में पूर्व सैनिक रामचंद देवांगन के करकमलों से हुआ वीर बलिदानी मनीष नेताम के बलिदान स्मारक का भूमि पूजन

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धमतरी जिले के ग्राम खरेंगा के वीर सपूत, 24 वर्षीय जवान मनीष नेताम ने भारतीय सेना की मराठा रेजिमेंट में अपनी सेवाएं देते हुए लेह-लद्दाख की दुर्गम सीमा पर, माइनस 20 डिग्री तापमान में भी अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। 28 दिसंबर 2022 को मां भारती की रक्षा करते हुए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके इस महान बलिदान के बाद उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जहां उन्हें मां भारती की गोद में सदा के लिए समर्पित कर दिया गया।

बलिदानी मनीष नेताम की द्वितीय पुण्यतिथि से पहले, उनकी स्मृति को अमर करने के लिए शहीद स्मारक भूमि का भूमि पूजन संपन्न हुआ। यह श्रद्धांजलि समारोह भूतपूर्व सैनिक श्री रामचंद्र देवांगन द्वारा आयोजित किया गया, जो वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल धमतरी के जिला मंत्री हैं। एक सैनिक के नाते, रामचंद्र देवांगन ने अपने वीर सैनिक भाई के प्रति गहरा सम्मान प्रकट करते हुए इस भूमि पूजन को अंजाम दिया। उनके लिए देश सेवा और धर्म सर्वोपरि हैं, और इसी भावना के साथ उन्होंने बलिदानी मनीष नेताम को यह सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस भूमि पूजन कार्यक्रम में बलिदानी मनीष नेताम के माता-पिता, श्रीमती शकुंतला नेताम और श्री राजेंद्र नेताम की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी भावुक बना दिया। साथ ही, ग्राम पंचायत खरेंगा के सरपंच और भूतपूर्व सैनिक दिलीप कुमार साहू, भगवती प्रसाद साहू, साहू समाज प्रमुख एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री दयाराम साहू, और कई ग्रामीण जनों ने भी इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दी।

यह कार्यक्रम सिर्फ एक सैनिक को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उनके अद्वितीय साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को सदा के लिए स्मरण रखने का संकल्प था। इस आयोजन ने गांव के लोगों और समस्त समाज के लिए प्रेरणा का एक नया स्रोत प्रदान किया, जिससे मनीष नेताम की वीरता की गाथा हमेशा जीवित रहेगी।
इस अवसर पर श्री रामचंद्र देवांगन जी ने कहा : “आज हम सभी यहां एकत्रित हुए हैं, न केवल एक वीर जवान, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत मनीष नेताम की स्मृति में। उनका बलिदान केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष नहीं था, बल्कि यह हमारी मातृभूमि के प्रति उनकी अपार निष्ठा और समर्पण का प्रतीक था।
जब मनीष ने अपने प्राणों की आहुति दी, तो उन्होंने हम सभी को यह सिखाया कि सच्ची देशभक्ति क्या होती है। उनके साहस और समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज, हम शहीद मनीष नेताम की द्वितीय पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति में शहीद स्मारक भूमि का भूमि पूजन कर रहे हैं। यह स्मारक न केवल उनके बलिदान का प्रतीक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा भी बनेगा।

हम सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मनीष जैसे वीरों की गाथाएं हमेशा जीवित रहें। हमें अपने देश की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए और मनीष के साहस से प्रेरणा लेनी चाहिए। मैं उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और यह विश्वास दिलाता हूं कि हम हमेशा उनके बलिदान को याद करेंगे।

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