

कोरबा/कटघोरा:- सरकार की लाख योजनाओं के बावजूद गांवों की हालत जस की तस बनी हुई है। ताज़ा मामला कटघोरा ब्लॉक के रंजना से खोरोंगा पारा के बीच का है, जहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बना पुल पहली ही बारिश में बह गया।
जिस पुल को ग्रामीणों की सुविधा और संपर्क के लिए बनाया गया था, वो बारिश की पहली धार में ही धाराशायी हो गया। अब लोगों का आना-जाना पूरी तरह से ठप है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
जनजीवन पर आफत — बच्चे, मरीज, किसान सब बेहाल…
पुल बह जाने का असर सीधे-सीधे गांव के हर तबके पर पड़ा है।स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ और पानी भरे खेतों के रास्तों से होकर निकलने को मजबूर हैं। कई बच्चों के पैर फिसलकर गिरने की खबरें भी आई हैं।गर्भवती महिलाओं और बीमार मरीजों को गांव से बाहर अस्पताल तक पहुंचाना अब बड़ा जोखिम बन गया है। ग्रामीणों को खाट और ठेले में लादकर नाले पार कराने की नौबत आ गई है।किसान जो इस समय खेतों में धान की रोपाई में जुटे थे, वे अपने ही खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। बैल, खाद और बीज ले जाना तो दूर, खुद खेत तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
गांव की महिलाएं भी परेशान हैं, क्योंकि बाज़ार, राशन और दवा जैसी जरूरी चीज़ों के लिए भी अब निकलना जोखिम भरा सफर बन गया है।
कागजों में मजबूत, ज़मीन पर कमजोर निकला पुल!
गांव के लोग कहते हैं कि सरकार ने इस पुल को बनाने में लाखों रुपये खर्च किए होंगे। कागज में इसका पूरा ब्योरा भी दर्ज होगा — कितनी लंबाई, कितनी चौड़ाई, कितना सीमेंट, कितना लोहा लगा — सब कुछ फाइलों में चकाचक होगा। लेकिन हकीकत तो यही है कि पुल बारिश पानी की तरह बह गया….!
प्रशासन मौन….
पुल बहने की खबर गांव-गांव में फैल चुकी है, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई हलचल नजर नहीं आई है। न तो कोई अधिकारी गांव पहुंचा, न ही किसी ने यह जानने की कोशिश की कि लोग किस हाल में हैं।
निर्माण कार्य पर उठ रहे सवाल — क्या सिर्फ कागज़ों में हुआ था विकास?
पुल बहने के बाद एक ही सवाल “जब लाखों रुपए खर्च हुए, तो पुल कैसे बह गया?”





