कवर्धा: कबीरधाम जिले में महिला बाल विकास विभाग शासन और प्रशासन के नाक में दम कर रखा है। पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में आंगन बाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं को एक बैनर पर ला शासन,प्रशासन की कमर ढीली कर देने वाली हड़ताल,धरना और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे घटनाएं सिर्फ और सिर्फ कबीरधाम जिले से ही जन्म लेती हैं जिसका विशालकाय भयावहता रूप लेते हुए समूचे प्रदेश पर सरकार के लिए सिर दर्द नुमा समस्याएं पैदा कर देती हैं।
समूचे सूबे में आंगनबाड़ी केंद्र हो जाती हैं बंद
इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि आंगन बाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका का नियुक्ति मानदेय स्वरूप वेतन पर सरकार के द्वारा महिलाओं व बच्चों के शैक्षणिक तथा मासिक विकास के साथ साथ उनके स्वास्थ्य के प्रति ध्यान देते हुए पोषण का विशेष खयाल रखने के लिए कार्यभार संभाले जिम्मेदारी दी गई है। जिसका मुखिया जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग होता है जो प्रत्येक जिले में नियुक्त होता वहीं इसका छोटा रूप सेक्टर स्तर पर एक परियोजना के रूप चिन्हांकित हैं। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि ये छोटे परियोजनाओं का रिमोट कंट्रोल जिला कार्यक्रम अधिकारी के ही हाथों में होता है।
कबीरधाम जिला कार्यक्रम अधिकारी की कार्यशैली कहीं न कहीं संदिग्ध
समूचे सूबे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के द्वारा सरकार के विरोध कहा जाए या फिर अपनी कार्य के अनुसार मांग। करने केवल कबीरधाम जिले की इस विभाग के ही कर्मचारियों के द्वारा इस मामले हमेशा आवाजें उठाई गई हैं।
मीडिया से बात करते हुए एक आंगन बाड़ी कार्यकर्ता जो अपने संघ की ओर से प्रतिनिधि करती हुई बताई है की समूचे प्रदेश में होने वाली योजनाएं जो लागू करवानी है अथवा मांग रखनी हैं,कबीरधाम जिले से ही शुरुआत होता है जिसके बाद पूरे प्रदेश भर विभागीय कार्यकर्ताएं, सहायिकाएं इस मामले अपनी सहमति जताते हुए समर्थन में आ जाती हैं।
इस तरह की जिले में होने वाली लगातार समस्याएं जो छत्तीसगढ़ राज्य को ही नहीं सरकार की कुर्सी डगमगा देने में,कहीं न कहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग कबीरधाम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल उठाता है कि क्यों और किसलिए नहीं सम्हाल पा रहा इस विभाग को कबीरधाम जिले के महिलाओं और बाल्यावस्था को पोषित, स्वास्थ्य संरक्षित करने वाला अधिकारी।
क्या यह समाचार जिले ही नहीं बल्कि समूचे सूबे में कारगर साबित होगा
क्या छत्तीसगढ़ में केंद्र की योजनाएं जो निःशर्त बच्चों और गर्भवती तथा शिशुवती माताओं को सेवा देने का कार्य करते हैं वह इस तरह हो रहे धरना, मांग, अनिश्चितकालीन हड़ताल से उनके हक अधिकार खत्म नहीं होते हैं यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
जिला प्रशासन कबीरधाम इस विषय पर संज्ञान में लेती है या सूबे के मुखिया विष्णुदेव साय इस समाचार में पिरोए गए तथ्यों को गहनता से अध्ययन कर सही निर्णय लेगा। जिससे समस्याओं का सरलता से समाधान हो सके। वहीं सरकार को चाहिए कि आलसी और अपने वेतन मात्र तालुक रखने वालों अधिकारी को दंतेवाड़ा, बस्तर,सुकमा आदि जैसे आरामदायक स्थानों पर सेवा क्षेत्र पर स्थानांतरित करें।