संवाददाता: अजय जांगड़े कबीरधाम: छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम तो बना है पर समय के हिसाब से कानून प्रभावी रूप से शख्त नजर नहीं दिखाई पड़ रही है। वैसे हुआ और जुआ,शराब की कहानी मानव समाज के उत्सर्जन से शुरू हो गया था पर मानव समाज में सभ्यता और जागरूकता आने के साथ ही जुआ तथा शराब पर मानव समाज स्व विवेक से भविष्य में जीवन को घातक करने वाली व्यसन समझ प्रतिबंध लगाना शुरू हो गया था। बढ़ते समय काल व देश की आजादी के बाद संविधान लागू होने पर इस तरह की मानव जाति पर जिस कार्य के होने से घातक व समस्याएं उत्पन्न हो ऐसे कृत्य पर अंकुश लगा दिया गया है। शराब बहुतेरे गांवों व शहरों में चौक चौराहों में सामान्य रूप से बिकते देखा जाता है वही ढाबा आदि स्थानों पर भी इसकी बेतरतीब सेवा का लाभ लोगों को निर्भय होकर प्रदान किया जा रहा है। बात करें जुआ की तो जुआ कानून के नजरों से आंख मिचौली खेलने के समान ही है जो लगातार किसी न किसी रूप से संचालित हो ही रही है जिस पर प्रशासनिक अमला के द्वारा महीनों हो चुके हैं कार्यवाही करने में कोताही बरती जा रही है। यह बात और जानकारी से कोई भी ऐसा शख्स नहीं है जो न जानता हो कि दीवाली पर जुआ जैसे खेल की जगह जगह स्थापना किया जाता है जहां कम समय में अधिक धन अर्जित करने के लालसा में वशीभूत हो भोले भाले लोग भी अपनी दिवाली की खुशी खत्म कर अनेक अनैतिक कार्यों को अंजाम दे बैठते हैं। कबीरधाम जिले में जगह जगह पर हो रही जुआ का खेल पर पुलिस की कार्यवाही देखने को नहीं मिल रहा है जो वास्तव में कानून व्यवस्था पर शिथिलता होने को दर्शाता है ,तथा जाने अनजाने से समाज में कुरीतियों को बढ़ावा देना जैसे निष्कर्ष को चिन्तन करने पर विवश कर रहा है। जिला प्रशासन को इस मामले में सक्रियता से संज्ञान लेते हुए समाज को एक स्वच्छ संदिग्ध गतिविधि मुक्त वातावरण प्रदान करने में सहभागिता सुनिश्चित करना चाहिए जिससे लोगों में कानून व्यवस्था से जुड़े हुए उस पर उम्मीद जता अपनी भावनाओं से सराहा जाए।