कवर्धा, कबीरधाम जिले के सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं विद्यालय में अध्ययनरत बच्चे,प्राथमिक विद्यालय हो या माध्यमिक विद्यालय ही क्यों ना हो समस्याओं का अंबार ही है।ब दर्जनों विद्यालयों में शौचालय उपयोगिता के लायक नहीं और सैकड़ों विद्यालयों में तो शौचालय टूटी पड़ी है जो भ्रष्टचार की भेंट चढ़ने वजह से है। सरकार की नीति तो सही रहती हैं गुणवत्ता में सुधार लाने की लेकिन इनके बीच सियासी जनप्रतिनिधि और भ्रष्ट ठेकेदार के द्वारा अपनी खजाना का वजन बढ़ाने के कारण इस तरह गुणवत्ता हीन कार्य किया जाता हैं।
विडंबना है कि इन भ्रष्ट ठेकेदारों को सह कोई और नहीं बल्कि निर्माण कार्य में से जुड़ी विभाग के अधिकारी ही है जो शिकायत होने पर लेनदेन कर दिखावे की कागजी कार्यवाही कर खुली छूट दे रहे जिसका परिणाम स्वरूप छोटे छोटे बच्चों से लेकर आम जनों के लिए हितकारी साबित नहीं हो रहा है और शासन प्रशासन की ओर इशारा करता हुआ समस्या खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा।
जन जीवन की आत्मा जिसे शिक्षा के रूप में देखा जाता है जो जीवन का अमूल्य रत्न है जिससे देश क्या समूचे विश्व के लोगों के लिए अति आवश्यक और जन्म सिद्ध अधिकार है।
बच्चों की मूलभूत सुविधाओं का हनन होना देश के गरिमा को ठेस पहुंचाने के समान है।
लोकतंत्र की समय काल में ऐसा दुर्दशा होना दुर्भाग्य की बात है जिस जिले अथवा राज्य की दुर्दशा ऐसा होता है जहां नन्हे मुन्ने विद्यार्थियों के जीवन की स्वंत्रता छीन ली जाती है चाहे वह प्रत्यक्ष रूप से हो या अप्रत्यक्ष तौर पर ही क्यों ना हो ? वहां की कार्य शैली को चुनौती देती व्यवस्था है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने महत्वपुर्ण योजना मध्यान भोजन संचालित किया है जो पहले प्राथमिक स्तर पर था फिर शिक्षा के अधिकार के तर्ज पर माध्यमिक स्तर तक लागू हुआ जिससे शिक्षा में गुणवत्ता तथा सुधार आ सके।
ठीक इसी तरह विद्यालय में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के लिए विद्यालय परिसर पर शौचालय की भी सुविधा संबंधी कानून पास किया गया जो उनके मौलिक अधिकार के तहत आते हैं।
जिले में छात्र छात्राओं के मौलिक अधिकार का हनन जोर शोर से हो रहा है, कही शौचालय नही अगर है तो वह जर्जर हाल पर ,कभी भी गिर सकता है छत जिससे हमेशा दुर्घटना होने की भय बना रहता है।
मध्यान भोजन कक्ष की कमी ने तो हद ही कर दिया
रसोइयों की चैन अमन लूट डाली है व्यवस्था, खाना बनाते वक्त उन्हें संकरा छोटा सा कमरे में खाना बनाने के लिए निर्देश तो कर दिया जाता है लेकिन उनकी पीड़ा को न शासन और प्रशासन ही समझ पा रहा है।
मध्यान भोजन कक्ष चूल्हे में लकड़ी से आग जलाकर भोजन बनाया जाता है जिसमे पूरे कक्ष में धुआं भरा रहता है,कम वेतमान पर इतना समस्या भरी धुआं में काम करना जिससे आंख और फेफड़े पर प्रभाव होना सहज है फिर भी नन्हे मुन्ने छात्र छात्राओं को भोजन कराना अपना कृत्य ही नहीं सौभाग्य मान सेवा दे रहे हैं।
मध्यान भोजन में गड़बड़ी
बहुतेरे विद्यालयों में सही ढंग से भोजन मुहैया ना हो पाने का मामला भी सामने आ रहा है जो किसी भी गांव शहर, कस्बा से अछूता नहीं है।निर्धारित मेनू चार्ट के अनुसार मध्यान भोजन नही कराना ,मध्यान भोजन संचालित करने वाले संस्था तथा वैकल्पिक संचालन कर्ता का कमाई की विशेष जरिया बना हुआ है।शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी सभी पहलुओं के लिए लगातार मॉनिटरिंग की आवश्यकता जिससे व्यवस्था में सुधार हो सके और बच्चो के मौलिक अधिकार उनको मिल सके साथ ही सरकार की योजना सरल, सहज ढंग से क्रियान्वित हो सके।