
कवर्धा , वनमंडलाधिकारी के निर्देशन एवं उपवनमंडलाधिकारी सहसपुर लोहारा के मार्गदर्शन में दिनांक 29.06.2024 को परिक्षेत्र सहसपुर लोहारा अंतर्गत् परिसर अकलामा कक्ष क्रमांक 254 संरक्षित वन (ग्राम घुघवादहरा) में गुजरात से आये भेड़-बकरी वालों के द्वारा अवैध रूप से वनक्षेत्र में प्रवेश कर भेड़-बकरियों को चराई कराते हुये को पकड़ा गया। मौके पर ऊंट 20 नग, भेड़ 1000 नग एवं बकरी 150 नग का जप्ती की कार्यवाही किया गया एवं आरोपी वीभा वल्द राजा, जाति रब्बारी, साकिन वामका, जिला – भुज (गुजरात) के विरूद्ध वन अपराध प्रकरण 20738/2 दिनांक 29.06.2024 दर्ज कर भेड़-बकरियों को वनक्षेत्र से बाहर निकाला गया। प्रकरण में आरोपी से मनी रसीद क्रमांक 6282/51 दिनांक 30.06.2024 द्वारा क्षतिराशि रूपये 10000.00 (अक्षरी – दस हजार रूपये मात्र) वसूल किया गया। वनक्षेत्र में भेड़-बकरियों का प्रवेश निषेध हेतु वन कर्मचारियों के द्वारा लगातार वनक्षेत्र में गश्ती कर निगरानी किया जा रहा है पर इससे पहले भी इनसे वसूली किया गया था जिसे विभाग के द्वारा दिखाया, बताया गया नही था आपको बता दें ये भेड़ चरवाहा हमेशा जंगल में ही रहते हैं करोड़ों की वन संपदा को नुकसान पहुंचाते वहीं थोड़ा सा कार्यवाही कर साबसी ले रहा विभाग।
भेड़ पालक लोहारा के ही जंगल में सबसे अधिक पाए जाते है जो वन अफसर रेंज अधिकारी के सह से ही होता है चराई काट लेना समस्या का समाधान नहीं है इन्हे वन क्षेत्र में ही नही रहने देना चाहिए जिससे वन सुरक्षित रह सके क्या वन अधिनियम में इन लोगो के लिए चराई व्यवस्था है?
यह बिल्कुल इनकार नही किया जा सकता की इनको चराई शुल्क लेकर भी इन्हे चराई की अनुमति नहीं दी सकती लेकिन वन अफसर अनुराग वर्मा के रेंज में ही अक्सर रहते हैं ये लोग।क्या वन मंडल अधिकारी इन घटनाओं से अवगत होंगे या इनके संज्ञान में ही नही।





